नई दिल्ली: भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और एआई (AI) क्षमता अब वैश्विक दिग्गजों को आकर्षित कर रही है। दक्षिण कोरिया की प्रमुख इंटरनेट कंपनी नावेर (Naver), गेमिंग दिग्गज क्राफ्टन (Krafton) और मिराए एसेट (Mirae Asset) ने मिलकर भारत के भविष्य की तकनीक में निवेश के लिए 700 अरब वॉन (लगभग 476.4 मिलियन डॉलर या ₹4,300 करोड़) का एक विशाल फंड बनाया है।
यूनिकॉर्न ग्रोथ फंड (UGF) का लक्ष्य
इस निवेश कोष का नाम यूनिकॉर्न ग्रोथ फंड (UGF) रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में एआई, फिनटेक और कंटेंट (Content) जैसे उच्च विकास वाले क्षेत्रों में काम कर रही तकनीकी कंपनियों और स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
निवेश संरचना: इस फंड की शुरुआत क्राफ्टन द्वारा 200 अरब वॉन के निवेश से हुई थी, जिसमें बाद में नावेर और मिराए एसेट ने 500 अरब वॉन का योगदान दिया।
भविष्य की योजना: तीनों कंपनियों ने इस फंड को भविष्य में 1 लाख करोड़ वॉन तक ले जाने पर सहमति जताई है।
नावेर और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीच समझौता
निवेश के साथ-साथ नावेर ने भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी TCS के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
क्षेत्र: यह साझेदारी मुख्य रूप से एआई, क्लाउड और बिजनेस-टू-कंज्यूमर (B2C) सेवाओं पर केंद्रित होगी।
लक्ष्य: दोनों कंपनियां भारतीय बाजार में डिजिटल परिवर्तन (Digital Transformation) और एआई समाधानों के अवसरों का लाभ उठाएंगी।
भारत: वैश्विक डिजिटल नवाचार का नया केंद्र
नई दिल्ली में आयोजित 'दक्षिण कोरिया-भारत व्यापार मंच' के दौरान नावेर की सीईओ चोई सू-येओन ने भारत की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा:
"भारत अपने विशाल आईटी टैलेंट और गतिशील स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर ग्लोबल डिजिटल इनोवेशन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह फंड हमारी मुख्य क्षमताओं को मिलाकर एक मजबूत तालमेल (Synergy) बनाने का आधार बनेगा।"
प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी
इस कार्यक्रम में दोनों देशों के शीर्ष नीति-निर्माता और व्यापारिक नेता शामिल हुए, जिनमें शामिल थे:
दक्षिण कोरियाई उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान।
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल।
क्राफ्टन के सीईओ किम चांग-हान।
मिराए एसेट इंडिया के उपाध्यक्ष स्वरूप मोहंती।
टीसीएस के अध्यक्ष उज्ज्वल माथुर।
निष्कर्ष: दक्षिण कोरियाई कंपनियों का यह भारी निवेश भारत के 'एआई इंडस्ट्री इकोसिस्टम' को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। यह न केवल भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पूंजी के द्वार खोलेगा, बल्कि कोरियाई तकनीक और भारतीय टैलेंट के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण भी करेगा।