मथुरा में हिंसा के पीछे कौन?
इस तरह की संगठित हिंसा धार्मिक, राजनितिक और प्रशासनिक असफलता को नहीं दर्शाता?
03 Jun 2016
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सवाल है कि इस तरह के सोंच रखने वाले व्यक्ति या समूह को जिसे भारतीय संविधान में ही आस्था नहीं हो पहले से ही कानून के दायरे में क्यूँ नहीं लाया गया? क्या ऐसी आक्रामक और असंवैधानिक विचारों को जिस धार्मिक या राजनीतिक पंथ से मदद मिलती रही उसे इस हिंसा के प्रति जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए?
इस देश में पहले भी धार्मिक, सामजिक या राजनीतिक कट्टरता ने ऐसे ही कई हिंसक परिणामों को अंजाम दिया है फिर भी क़ानून समय रहते इन्हें क्यूँ नहीं रोक पाता? निसन्देह इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार सता के शीर्ष पर बैठे वो लोग हैं जो ऐसे व्यक्ति और समूहों को अपने फायदे के लिए गाहे बजाहे इस्तेमाल करते रहतें हैं और इनके खिलाफ किसी भी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को रोकते रहते हैं.
इस मामले में खुलासा हुआ है कि मथुरा के डीएम को इस ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी. क्योंकि, वो चाहते थे कि शनिवार को यह कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही जिले के एसएसपी और डीएम के बीच आपसी तालमेल की कमी का मामला भी सामने आया है. बताया जा रहा है कि सिटी एसपी अपनी टीम के साथ मौके पर मुआयना और रेकी करने गए थे. ऐसे में यहाँ पर एक बड़ी प्राशाससनिक लापरवाही भी सामने आती है जिसकी बड़े पैमाने पर जांच होनी चाहिए.
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