विदेशी चंदे के गलत इस्तेमाल के लिए बैन NGO को कांग्रेस और वाम का साथ क्यूँ?
मोदी सरकार के विरोधी बुद्धिजीवियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला.
04 Jun 2016
|
1143
इंदिरा जयसिंह ने जुलाई, 2009 से मई, 2014 तक बतौर एएसजी काम करते हुए 96.60 लाख रुपए प्राप्त किए थे. एसोसिएशन ने 30 मार्च, 2016 के अपने जवाब में यह बात स्वीकार की है. उन्हें (इंदिरा जयसिंह को) एनजीओ ने केंद्र सरकार की इजाजत से 59 महीनों (जुलाई, 2009 से मई, 2014) के लिए 81.41 लाख रुपये दिए थे.
गृह मंत्रालय ने कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि कैसे अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल जैसी एक वरिष्ठ विधि अधिकारी एक साथ ही और यह भी कि लंबी अवधि तक एक निजी निकाय के रॉल पर रह सकती हैं और कैसे उन्हें भारत सरकार के विधि अधिकारियों पर लागू नियमों के विपरीत अज्ञात उद्देश्यों के लिए (विदेशी चंदे) भुगतान किया जा सकता है. इसके अलावा कैसे एसोसिएशन (इस आशय के बिना किसी प्रस्ताव के) ऐसी व्यवस्था पर राजी हो गया और वह क्यों (उपयुक्त अनापति हासिल किए बगैर, जिसे हासिल करना एफसीआर, 2010 के तहत जरूरी है) ऐसी व्यवस्था पर राजी हो गईं.
नोटिस में कहा गया है कि यह न केवल एफसीआरए के प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि प्रासंगिक सवाल खड़े करता है. एनजीओ के खाते की जांच पर गृह मंत्रालय ने कहा कि यह पाया गया कि विदेशी अनुदान में से 13.03 लाख रुपये धरनों, मसौदा विधोयक से जुड़ी बैठकों के लिए सांसदों या मीडिया को लाने-लेजान या रुकने की व्यवस्था करने पर खर्च किया गया, हालांकि विदेशी अनुदान के तहत जो रिटर्न फाइल किया गया उसमें इसका कोई उल्लेख नहीं था.
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गुरूवार को कहा कि इंदिरा जयसिंह के एनजीओ के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई लोगों के हितों का समर्थन करने वालों के प्रति सरकार के असहिष्णु रवैये को दर्शाती है. दिग्विजय ने आगे देश के अधिवक्ताओं को उकसाया कि “अधिवक्ताओं क्या आप थोडी हिम्मत दिखाओगे और उनके लिए आवाज उठाओगे,अगली बारी आपकी हो सकती है.”उधर इसी मुद्दे पर हमेशा की तरह मोदी जी और बीजेपी सरकार के खिलाफ बोलने वाले हर्ष मंदर, अरुणा रॉय समेत 50 से ज्यादा कथित सामजिक कार्यकर्ताओं ने एक ज्ञापन जारी कर केंद्र सरकार की आलोचना की.
अब सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह और नक्सल हिंसा को समर्थन करने वाले ये समाजसेवी किस बात से नाराज हैं? लायर्स कलेक्टिव को बैन करने से या आने वाले दिनों में धरना-प्रदर्शन के नाम पर देश के खिलाफ होने वाली साजिशों में चंदे की रकम रुकने से उन्हें होने वाली नुकसान के कारण? दिल्ली के पौश इलाकों में अरबों के बंगले में रहकर, महंगी गाडिओं में 5 स्टार होटलों में मीटिंग करने वाले ये NGO पुरुष और महिलाएं जब से बीजेपी सरकार आई है अपने धंधे के मंदे होने से कभी असहिस्नुता , कभी सेकुलरिज्म खतरे में है, कभी पाठ्यक्रमों में इतिहास खतरे में है का नारा लगा कर चंद सेक्युलर मीडिया के ख़बरों में बने रहना चाहते हैं ताकि देश की जनता इन्हें भुला न दे. (विचार- सुधीर के सिंह.)
(लेख की राय लेखक का विचार है. पूर्वांचल सूर्य इसका समर्थन या विरोध नहीं करता)
अन्य खबरें
असफल शांति, बढ़ता युद्ध
12 Apr 2026 25
साइना नेहवालः जिद, युग, विरासत
16 Feb 2026 265
SHANTI: भविष्य का आधार
16 Feb 2026 274
आकाशीय संप्रभुताः SJ-100 बनेगा भारत का सारथी?
16 Feb 2026 246
आत्मनिर्भर भारत का 'रेयर अर्थ' संकल्प
16 Feb 2026 248
भारत-मलेशियाः नई कूटनीतिक धुरी
16 Feb 2026 196
संसद में टकराव, जवाबदेही पर सवाल
16 Feb 2026 182
पहचान का वनवास
16 Feb 2026 170
मराठा दुर्ग में 'आधुनिक पेशवा' का शंखनाद
16 Feb 2026 179
महाराष्ट्र का नया व्याकरणः ठाकरे विरासत का विसर्जन
16 Feb 2026 138
परिसीमन: ततैया का छत्ता
16 Feb 2026 201
डिजिटल रण और भारत का विवेक
16 Feb 2026 111
भारत-अमेरिका व्यापार समझौताः कूटनीतिक 'रीसेट'
16 Feb 2026 188
संक्रांति का शंखनाद, भारत-ईयू एफटीए
16 Feb 2026 198
केंद्रीय बजटः भविष्य का बजट, वर्तमान की चिंता
16 Feb 2026 170