मैं उन दिनों जमशेदपुर में एक रिसर्च स्कॉलर के रुप में टाटा ग्रुप के संस्थापक जमशेदजी टाटा की जीवनी कर्मवीर पुस्तक लिख रहा था।इस पुस्तक को टाटा वर्कर्स यूनियन के आग्रह पर टाटा स्टील के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डॉक्टर जेजे ईरानी के मार्गदर्शन में प्रकाशन कार्य चल रहा था। जब इस पुस्तक की फॉर्वर्डिंग आदरणीय रतन टाटा जी से लिखने का आग्रह किया गया तो उन्होंने बहुत ही सधे हुए शब्दों में लिखकर हार्दिक खुशी प्रकट की और जमशेदपुर आए तो टाटा वर्कर्स यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष आरबीबी सिंह ने उनसे मिलवाया।फिर उन्होंने पूछा कि हमारे फाउंडर की बायोग्राफी लिखने की प्रेरणा तुम्हे कैसे मिली।मैंने उन्हें जवाब दिया कि सर संस्थापक का राष्ट्रवादी, स्वाभिमानी और जनकल्याणकारी व्यक्तिव ने मुझे उनकी जीवनी लिखने को प्रेरित किया। इसपर उन्होंने कंधे पर हाथ थपथपाकर मुझे प्रोत्साहित किया और बोले की सिस्टम तुम्हें हर संभव सपोर्ट देगा।बाद में पुस्तक छपी और कुछ साल बाद जब वो जमशेदपुर आए तो यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय की उपस्थिति में मैंने उन्हें पुस्तक कर्मवीर भेंट की। वह काफी खुश हुए और मुझे आशीर्वाद दिया।वह ऐतिहासिक और अविस्मरणीय पल अब भी मेरे जेहन में है। ऐसे थे रतन टाटा।डाॅ.एमएस सिंह मानस लेखक कर्मवीर,टाटा वर्कर्स यूनियन।