नई दिल्ली

देश में चीनी की आसमान छूती कीमतों पर नियंत्रण पाने और घरेलू बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एथनॉल खरीद नीति में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के तहत सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा गन्ने के रस (Sugarcane Juice), चीनी के सिरप और बी-हेवी (B-Heavy) शीरे से बने एथनॉल की खरीद पर रोक लगा दी गई है।

सरकार का प्राथमिक उद्देश्य गन्ने के अधिकतम हिस्से को एथनॉल के बजाय चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कराना है, ताकि देश में चीनी के गहराते संकट को टाला जा सके।

क्यों पड़ी नीति बदलने की जरूरत?

पिछले कुछ हफ्तों में घरेलू बाजार में चीनी के भाव में बहुत तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:

  • एथनॉल में चीनी का भारी इस्तेमाल: पिछले वर्ष लगभग 29 लाख टन चीनी का उपयोग एथनॉल बनाने में किया गया था।
  • मौसम की मार और फसलों का नुकसान:
    • अल-नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है।
    • उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में बाढ़, कीटों और बीमारियों के प्रकोप के कारण गन्ने की पैदावार घटने की आशंका है।
  • उत्पादन और खपत का अंतर: देश में हर साल चीनी की सालाना खपत लगभग 300 लाख टन है, जबकि इस वर्ष कुल उत्पादन घटकर 280 लाख टन रहने का अनुमान है। इस 20 लाख टन के घाटे की भरपाई के लिए यह एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी था।

निविदा में बदलाव: किन स्रोतों से खरीदा जाएगा एथनॉल?

तेल विपणन कंपनियों ने हाल ही में 1100 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद के लिए नई निविदा (Tender) जारी की है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि:

  • किन पर लगी रोक?
    • गन्ने का रस (Sugarcane Juice)
    • चीनी का सिरप
    • बी-हेवी (B-Heavy) शीरा
  • किन स्रोतों को मिली अनुमति?
    • मक्का (Maize)
    • टूटा अनाज (Broken Rice)
    • भारतीय खाद्य निगम (FCI) से लिया गया अतिरिक्त चावल
    • सी-हेवी (C-Heavy) शीरा (यह चीनी उत्पादन का उप-उत्पाद है, जिसमें चीनी की मात्रा न्यूनतम होती है, अतः इससे चीनी आपूर्ति प्रभावित नहीं होती)।
सरकार एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को पूरी तरह रोकने के बजाय उसके लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Feedstock) के संतुलन को बदलना चाहती है।

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नीतिगत बदलाव के दूरगामी प्रभाव और चुनौतियाँ

1. चीनी मिलों की कमाई पर असर

जिन चीनी मिलों ने गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से सीधे एथनॉल बनाने के लिए भारी बुनियादी ढांचा तैयार किया था, उनकी बिक्री और कमाई पर इसका सीधा असर पड़ेगा। अब उन्हें अपनी उत्पादन योजनाओं में तुरंत बदलाव करना होगा।

2. खाद्य सुरक्षा और पशुचारे पर दबाव

पेट्रोल में एथनॉल मिलाने (Blended Petrol) से कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता घटती है और कीमती विदेशी मुद्रा की बचत होती है। हालांकि, एथनॉल के लिए अनाज (मक्का और चावल) पर निर्भरता बढ़ाने से खाद्य सुरक्षा और पशुचारे (Fodder) की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

वर्तमान में सरकार के सामने दोहरी चुनौती खड़ी है—एक तरफ आम जनता को चीनी की बढ़ती कीमतों से राहत देना और दूसरी तरफ हरित ईंधन (Ethanol Blending Target) की आपूर्ति बनाए रखना। सरकार को इस संतुलन को बनाए रखने के लिए खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के बीच एक बेहद सूक्ष्म और सटीक नीतिगत तालमेल बनाकर चलना होगा।

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