लखनऊ।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का चुनावी दंगल दस फरवरी शुरू होने जा रहा है,लेकिन प्रदेश में अभी भी जबरदस्त सियासी उठापटक धोबिया पछाड़ के साथ जारी है।योगी मंत्रिमंडल के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद ऐसा लगने लगा था कि कुशीनगर और आसपास के जिलों में भाजपा कमजोर पड़ जाएगी,मगर क्या कांग्रेंस के दिग्गज नेता आरपीएन सिंह के भाजपा में शामिल होने से स्वामी प्रसाद मौर्य के भाजपा से जाने से हो रहे नुकसान की भरपाई हो पाएगी या स्वामी के चुनावी कैरियर पर ही ग्रहण लग जाएगा।बैरहाल इन सवालों का उत्तर तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही मिलेगा।आने वाले दिनों में पड़रौना के आसपास की सियासत में काफी उबाल दिखाई देगा।

आरपीएन सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के लिए एक विश्वसनीय संगठन वाले व्यक्ति थे और हमेशा बड़े टिकट वाले कांग्रेस कार्यों के लिए अहम भूमिका निभाई। आरपीएन सिंह का राहुल गांधी और दिवंगत अहमद पटेल सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के साथ अच्छे कामकाजी संबंध थे। 2009 में कुशीनगर से पहली बार सांसद बने और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ विभिन्न विभागों की बागडोर संभाली। 2019 में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए हेमंत सोरेन की झामुमो और अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन करने के लिए झारखंड में कांग्रेस पार्टी के अभियान का नेतृत्व करने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी।

आरपीएन सिंह कुशीनगर के शाही सैंथवार परिवार से ताल्लुख रखते हैं।आरपीएन सिंह के लिए दिक्कत 2007 से शुरू हुई जब स्वामी प्रसाद मौर्य डलमऊ विधानसभा (अब ऊंचाहार) सीट से कांग्रेस के अजय पाल सिंह से पराजित हुए।उस समय मौजूदा मुख्यमंत्री मायावती ने स्वामी को उच्च सदन में भेजा और कैबिनेट मंत्री बनाया। 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी पैसा और ताकत के बल पर सेफ विधानसभा सीट खोजने में लगे थे।आरपीएन सिंह पडरौना विधानसभा सीट से 1996, 2002 और 2007 में लगातार तीन बार जीत का परचम लहराया।

आरपीएन सिंह को 2009 में कुशीनगर से सांसद चुने जाने के बाद विधानसभा सीट खाली करनी पड़ी थी।यह तब है जब स्वामी ने 2012 में पडरौना विधानसभा सीट जीतने के लिए बड़ा दांव खेलने का फैसला किया। स्वामी ने 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कूदकर छलांग लगाई और भाजपा के टिकट पर 8,162 वोटों के अंतर से जीत का परचम लहराया।पडरौना की पराजय ने आरपीएन सिंह को रैंक कर दिया और वो अपने घर के चुनावी मैदान से एक और चुनाव में पराजय का जोखिम भरा कदम नहीं उठा सकते थे,लेकिन कांग्रेस कोई समर्थन देने की हालत में नहीं थी।स्वामी के भाजपा छोड़ने से आरपीएन सिंह को स्थिति को बदलने के लिए मौका मिला है।

खबर है कि कुशीनगर जिला कांग्रेस प्रमुख और राजकुमार सिंह और 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मनीष जायसवाल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। दोनों ने भाजपा को समर्थन देने की पेशकश की है।आरपीएन सिंह के भाजपा में शामिल होने से उन्हें न केवल विधानसभा चुनाव में पडरौना में स्वामी से मुकाबला करने का बल मिलेगा,बल्कि भविष्य में लोकसभा में कुशीनगर का प्रतिनिधित्व करने की संभावना भी बढ़ेगी।

भाजपा आरपीएन सिंह को सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ पडरौना से चुनावी मैदान में उतार सकती है। आरपीएन सिंह के अपने सामने चुनाव लड़ने की खबरों पर स्वामी ने कहा मेरा एक छोटा सा कार्यकर्ता भी आरपीएन सिंह को हराने की क्षमता रखता है।