साहिबगंज।झारखंड की परिवहन व्यवस्था अभी भी कष्ट दे रही है।ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए बसें न के बराबर हैं।कई इलाके ऐसे हैं जहां लोगों को 24 किलोमीटर पैदल चलने के बाद बस मिलती है।
आपको बता दें कि झारखंड में बस परिवहन निजी ऑपरेटरों के हाथ में है।निजी ऑपरेटर उन रूटों पर बस चलाना पसंद करते हैं,जिस रूटों पर उनको ज्यादा मुनाफा होता है।निजी ऑपरेटरों के इस रवैए से दूर-दराज के लोगों को काफी असुविधा होती है।बस से साहिबगंज से लगभग 500 किमी दूर राजधानी रांची पहुंचने में 12 घंटा लगता हैं।अगर इस जिले के किसी प्रखंड से यह यात्रा करनी हो तो 15 घंटे लग जाते हैं। यही स्थिति गढ़वा के वलासपुर का है।यहां से राजधानी रांची की दूरी 250 किलोमीटर है,लेकिन बस से 8 घंटा लगता हैं। भवनाथपुर विधायक भानु प्रताप शाही कहते हैं कि गढ़वा के सुदूर गांवों से राजधानी रांची के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं है।
ऑटो से या पैदल चलिए
साहिबगंज प्रखंड की मखमलपुर पंचायत के कारगिल दियारा से प्रखंड मुख्यालय की दूरी 24 किलोमीटर है।बीडीओ सुबोध कुमार भी मानते हैं कि जिनके पास अपना वाहन नहीं है उनको पैदल ही ये दूरी तय करनी पड़ती है। राजमहल के गदाई दियारा के लोग प्रखंड मुख्यालय पहुंचने के लिए पहले नाव से गंगा पार करते हैं और 15 किलोमीटर की दूरी ऑटो से तय करते है। सरायकेला की हेसाकोचा पंचायत के मुटूदा गांव के लोगों को 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
नहीं है कोई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था
पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा की जोरडीहा पंचायत से मुख्य मार्ग सिंगलौम जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीणों को मुख्य मार्ग के लिए 12 किलोमीटर और लिट्टीपाड़ा के लिए 30 किलोमीटर की दूरी अपनी व्यवस्था से तय करनी पड़ती है। सिमडेगा में तो जिला मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्रों में जाने के लिए दोपहर बाद बस ही नहीं मिलती। हजारीबाग के कटकमसांडी की दर्जनभर पंचायतों के लिए कोई सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था नहीं है।





