नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर तीखा जुबानी हमला करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का नारा महज एक दिखावा है, जबकि उसका असली इरादा देश में 'एक राष्ट्र, एक राजनीतिक दल' की व्यवस्था स्थापित करना है।

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं और उन पर दबाव बनाया जा रहा है।

'चंद्रपुर पुलिस की कार्रवाई दिल दहला देने वाली'

दिल्ली और महाराष्ट्र पुलिस की तुलना करते हुए दिपके ने कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि महाराष्ट्र पुलिस देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस बलों में से एक है और दिल्ली पुलिस को उनसे सीखना चाहिए। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दिल दहला देने वाला है कि चंद्रपुर पुलिस ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को नोटिस थमा दिया।"

उन्होंने बताया कि नोटिस में कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में भाग न लेने का निर्देश दिया गया है और उनसे यह तक पूछा गया है कि उनकी दिल्ली यात्रा और जंतर-मंतर पहुंचने के खर्च का स्रोत क्या है।

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'अग्रिम रूप से हिंसक आंदोलन का अनुमान कैसे?'

पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए सीजेपी प्रमुख ने पूछा:

  • भविष्यवाणी पर सवाल: पुलिस पहले से ही कैसे यह तय या अनुमान लगा सकती है कि हमारा शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक रूप ले लेगा?
  • संवैधानिक विचारधारा पर रोक: कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भड़काऊ पोस्ट न करने की हिदायत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "हम महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. आंबेडकर के विचारों और सिद्धांतों की बात करते हैं। क्या प्रशासन की नज़र में गांधी और आंबेडकर के विचारों को फैलाना हिंसा भड़काना है?"

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10 अक्टूबर का आह्वान किसी एक दल का नहीं

इससे पहले मंगलवार को सीजेपी ने विपक्षी 'इंडी ब्लॉक' (INDIA Bloc) द्वारा चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का स्वागत किया। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया कि 10 अक्टूबर को होने वाली उनकी लामबंदी (Mobilization) किसी विशेष राजनीतिक संगठन या दल के नेतृत्व वाला कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे देश के युवाओं के एक व्यापक और निष्पक्ष आह्वान के रूप में देखा जाना चाहिए।

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