मुंबई:

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार का दिन निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ। चौतरफा बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली के चलते दलाल स्ट्रीट पर हाहाकार मच गया। बीएसई (BSE) सेंसेक्स 570 अंक टूटकर 72,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ, वहीं एनएसई (NSE) निफ्टी 199 अंक फिसलकर 22,421 के स्तर पर आ गया।

कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1200 अंकों की भारी गिरावट के साथ अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर 71,292 तक गिर गया था। इस भयंकर गिरावट से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) घटकर 465 लाख करोड़ रुपये के नीचे आ गया, जिससे निवेशकों के लगभग ₹6 लाख करोड़ स्वाहा हो गए।

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क्यों टूटा बाजार? गिरावट के 4 मुख्य कारण:

  1. FIIs की रिकॉर्ड बिकवाली: विदेशी निवेशकों ने अकेले बुधवार को ₹10,148 करोड़ के शेयर बेचे। इस हफ्ते अब तक ₹26,000 करोड़ से अधिक की निकासी की जा चुकी है।
  2. US बॉन्ड यील्ड में तेजी: अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31% हो गई है, जो वर्ष 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। इससे निवेशक जोखिम भरे शेयर बाजार से पैसा निकालकर बॉन्ड में लगा रहे हैं।
  3. रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरकर 95.98 प्रति डॉलर पर आ गया।
  4. ऑटो सेल्स के सुस्त आंकड़े: सितंबर महीने की वाहन बिक्री के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के कारण निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 4% से अधिक की भारी तबाही देखने को मिली। महिंद्रा और मारुति के शेयर सबसे ज्यादा टूटे।

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25 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 2001 के बाद सबसे लंबी गिरावट

बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, यह लगातार 8वां हफ्ता है जब शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ है। वर्ष 2001 के 'डॉट-कॉम क्रैश' के बाद यह पहला मौका है जब बाजार में लगातार इतने लंबे समय तक गिरावट का दौर जारी रहा है। इस गिरावट ने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 के कोविड क्रैश के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।

बाजार में डर का पैमाना माना जाने वाला India VIX 12% से अधिक उछल गया, जो बाजार में अत्यधिक अस्थिरता को दर्शाता है। गिरावट के इस माहौल के बीच केवल एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे गिने-चुने शेयरों ने ही थोड़ा सहारा देने का प्रयास किया।

एक्सपर्ट्स की राय:
बाजार जानकारों का मानना है कि निफ्टी का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल 22,500 टूटने से तकनीकी बिकवाली बढ़ी है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड के दाम $98 से नीचे आना राहत का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बाजार का एक अल्पकालिक (Short-term) दौर है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत बुनियादी ढाँचे वाली कंपनियों के शेयर रियायती दामों पर खरीदने का यह बेहतरीन मौका हो सकता है।

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