नई दिल्ली:

मतदाता सूची (Voter List) में नाम खोजने वाले नागरिकों के लिए निर्वाचन आयोग (ECI) की तरफ से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पुराने मतदाता का नाम SIR (Special Information/Revision) की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं है, तो वे अंतिम सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म-6' (Form-6) भरकर दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।

आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि पहले से मतदाता होने के बावजूद फॉर्म-6 भरना किसी भी प्रकार की 'झूठी घोषणा' (False Declaration) नहीं माना जाएगा और न ही इस आधार पर जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला

चुनाव आयोग ने 'निलोतपल दत्ता व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग' मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के आदेश का हवाला देते हुए निर्देश जारी किया है। आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान या उसके बाद फॉर्म-6 जमा करने वाले किसी भी पुराने मतदाता के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

किन शर्तों का रखना होगा ध्यान?

यह राहत प्राप्त करने के लिए कुछ नियम और शर्तें भी तय की गई हैं:

  • दूसरी जगह नाम न हो: यह छूट तभी लागू होगी जब आवेदक या मतदाता किसी अन्य विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत न हो।
  • वैध घोषणा: फॉर्म-6 में दी जाने वाली घोषणाएं अन्य सभी कानूनी प्रावधानों के बिल्कुल अनुरूप होनी चाहिए।

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चुनाव आयोग की 10 अहम बातें (मुख्य बिंदु):

  1. पुराने वोटर्स को बड़ी राहत: ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होने पर पुराने मतदाता भी फॉर्म-6 भर सकेंगे।
  2. नए सिरे से आवेदन: अंतिम सूची में नाम शामिल कराने के लिए दोबारा पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  3. झूठी घोषणा का डर खत्म: पूर्व में पंजीकृत होने के बावजूद फॉर्म-6 भरने को झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा।
  4. धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं: केवल फॉर्म भरने के आधार पर ERO (चुनावी पंजीकरण अधिकारी) द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
  5. अन्य क्षेत्र में पंजीकरण नहीं: आवेदक का नाम देश के किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में एक्टिव नहीं होना चाहिए।
  6. हाईकोर्ट के आदेश का पालन: दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के फैसले के आधार पर यह स्पष्टता दी गई है।
  7. आशंकाओं का समाधान: फॉर्म भरने को लेकर मतदाताओं के मन में जो कानूनी आशंकाएं थीं, उन्हें दूर कर दिया गया है।
  8. व्यापक प्रचार के निर्देश: ECI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को इसे स्थानीय भाषाओं में व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के निर्देश दिए हैं।

चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद उन लाखों पुराने मतदाताओं को बड़ी राहत मिली है, जिनका नाम हालिया ड्राफ्ट सूचियों में छूट गया था।

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