लखनऊ।उत्तर प्रदेश में 2022 का विधानसभा चुनाव का सियासी रण खत्म गया है।इस सियासी रण में भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज की है,लेकिन उत्तर प्रदेश में समीकरण तेजी से बनते हुए दिख रहे हैं। नए समीकरणों के बीच अब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर की भारतीय जनता पार्टी की करीबी चर्चा का विषय बन गई है,तो वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को इस बात का अहसास है कि ओपी राजभर उनका साथ नही छोड़ेंगे। विधानसभा चुनाव के सियासी रण के नतीजों के बाद बदलती हुई सियासत ने 2024 लोकसभा चुनाव के सियासी रण से पहले बदलते हुए समीकरण का संकेत जरूर दे दिया हैं। भाजपा को भी इस बात का खासा एहसास है कि ओपी राजभर का साथ आना बहुत जरूरी है।

पूर्वांचल में राजभर ने भाजपा को काफी नुकसान पहुंचाया

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सियासी रण में पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा को काफी नुकसान पहुंचाया है।पूर्वांचल के आंकडों पर गौर किया जाए तो करीब 6 जिलों में भाजपा की हालत काफी हद तक कमजोर हुई है।खासतौर से राजभर मतदाताओं का वोट भाजपा को न मिलने से गाजीपुर,मऊ,जौनपुर,बलिया, आजमगढ़ समेत 12 जिलों में भाजपा का करीब 25 से 30 सीटों का नुकसान हुआ है।अब भाजपा ने विधानसभा चुनाव के सियासी रण में जीत के बाद भी 2024 लोकसभा चुनाव के सियासी रण में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए राजभर को साधना शुरू कर दिया है।

मिशन 2024 के लिए राजभर और जयंत भाजपा को जरूरी

नई अटकलों के बीच भाजपा के नेता ने बताया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अगर परिणाम सकारात्मक पाना है और उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 75 से अधिक सीटें जीतनी है तो पश्चिम यूपी में रालोद मुखिया जयंत चौधरी और पूर्वांचल में ओपी राजभर का साथ बहुत जरूरी है। उम्मीद है कि शीर्ष नेतृत्व इस दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में ओपी राजभर और जयंत चौधरी भाजपा के साथ नजर आ सकते हैं। भाजपा नेता ने पूर्वांचल के समीकरण को लेकर कहा कि निश्चिततौर पर पूर्वांचल के उन जिलों में भाजपा की हालत बेहद नाजुक है जहां राजभर मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। भाजपा को उम्मीद थी कि राजभर एक साथ ओपी राजभर के साथ नहीं जाएंगे,लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

राजभर की भाजपा में वापसी की अटकलें हुईं तेज

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सियासी रण में मिली हार के बाद ओपी राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में वापसी की अटकलें एक बार फिर से तेज़ी से शुरू हो गई हैं। पूर्व मंत्री ओपी राजभर के नेतृत्व वाली सुभासपा ने 2017 का विधानसभा चुनाव का सियासी रण भाजपा से गठबंधन कर लड़ा था।ओपी राजभर ने 2019 तक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट में मंत्री रहे।ओपी राजभर को गठबंधन विरोधी गतिविधियों के लिए बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद सुभासपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर उत्तर प्रदेश में 2022 विधानसभा चुनाव का सियासी रण लड़ा।

भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था पिछला विधानसभा चुनाव का सियासी रण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सियासी रण के नतीजों के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर लौटने की काफी हद तक उम्मीद है।पूर्व मंत्री ओपी राजभर के नेतृत्व वाली सुभासपा ने 2017 विधानसभा चुनाव का सियासी रण भाजपा के साथ गठबंधन कर लड़ा था।ओपी राजभर ने 2019 तक योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली कैबिनेट में मंत्री के रूप में भी काम किया, लेकिन उनको गठबंधन विरोधी गतिविधियों के लिए बर्खास्त कर दिया गया था।

पूर्वांचल में नया समीकरण बनाने की कवायद

सुभासपा ने सपा के साथ गठबंधन कर उत्तर प्रदेश में 2022 विधानसभा चुनाव का सियासी रण लड़ा।अब विधानसभा चुनाव के सियासी रण में भाजपा प्रचंड जीत से प्रदेश की सत्ता में लौटने के बाद कहा जा रहा है कि सुभासपा की भाजपा में वापसी की उम्मीद है।ओपी राजभर को मंत्री पद भी मिल सकता है।ओपी राजभर ने कथित तौर पर भाजपा के शाह केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लगभग एक घंटे तक मुलाकात की।ओपी राजभर फिर से भाजपा के गठबंधन में शामिल होंगे या नहीं इस पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।