गिरीडीह।झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की गठबंधन सरकार चल रही है। गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं।सरकार में कांग्रेस से मंत्री भी शामिल हैं,मगर सरकार की सहयोगी कांग्रेस बहुत उदास है।कांग्रेस ने हेमंत सोरेन सरकार के कार्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं।गिरिडीह से मधुबन में कांग्रेस के चिंतन शिविर में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने राज्य में चल रही गठबंधन सरकार पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार में एकतरफा घोषणाएं हो रही है और इन घोषणाओं में कांग्रेस की कोई भागीदारी नहीं हैं।अब ऐसे में गठबंधन से हमारा संगठन बच पाएगा कि नहीं ये सोचना होगा। ऐसे समन्वय से हम 2024 की लड़ाई नहीं लड़ पाएंगें।

सुबोधकांत सहाय ने कहा कि 5 साल तक झारखंड को स्थायी सरकार दिया जाएगा,लेकिन ये देखना होगा कि राज्य में पिछले 2 साल में जो सरकार चली है उसमें कांग्रेस कहां खड़ी है।उन्होंने कहा कि कल अगर समन्वय समिति बन भी जाए, तो उसकी रुपरेखा क्या होगी,अगर हम यह तय करेंगे तभी हम कह पाएंगे कि ये सरकार हमारी है।क्षेत्रीय दलों को लेकर कहा कि आज देश में क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व है और यही सच्चाई है।उनके साथ हमारा संघर्ष भी है,हिस्सेदारी की लड़ाई भी है,क्योंकि वे कांग्रेस की जमीन पर दखल देना चाहते हैं। जिस तरह से राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आंख में आंख डाल कर लड़ रहे हैं, तो दूसरी और क्षेत्रीय दलों की प्राथमिकता यह नहीं है।

मिल का पत्थर साबित होगा चिंतन शिविर

झारखण्ड प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस का यह चिंतन शिविर कांग्रेस के संगठन के साथ झारखंड के बेहतरी के लिए भी मिल का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि चिंतन शिविर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का फिजिकल तथा वर्चुअल तरीके से झारखण्ड के बेहतरी के लिए दिशा निर्देश प्राप्त हो रहा है। विभिन्न बिंदुओं पर नेताओं का मार्गदर्शन मिल रहा है।

राज्य के ग्रामीण विकास सह पंचायती राज मंत्री आलमगीर आलम ने झारखण्ड में जल्द पंचायत चुनाव कराने की बात कही।पंचायत चुनाव के मसले पर आलमगीर ने चिंतन शिविर में नेताओं से राय ली। पंचायत चुनाव पर एक स्वर में कांग्रेस नेताओं ने जल्द चुनाव कराने की मांग रखी।

विधायक दीपिका पांडेय ने कहा कि कोरोना के दौरान जब झारखंडवासियों को मदद की सबसे ज्यादा जरुरत थी उस समय कांग्रेस के एक-एक मंत्री, विधायक व कार्यकर्ताओं ने कार्य किया।

वहीं विनोवा भावे विश्वविद्य़ाल के पूर्व कुलाधिपति रमेश शरण ने कहा कि शहर में उद्योग लगे, औद्योगिक विकास हुए पर गांवों का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है। उन्होंने पर्यावरण, जल, जंगल, जमीन, विस्थापन, पलायन समेत अन्य मुद्दों पर बातें रखी। शिविर में सह प्रभारी उमंग सिंघार, सूबे के मंत्री रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम, बन्ना गुप्ता, बादल पत्रलेख, पूर्व सांसद तिलकधारी सिंह, विधायक इरफान अंसारी, सुबोध कांत सहाय, गीता कोड़ा, मधु कोड़ा, प्रदीप यादव, जयमंगल सिंह, पूर्णिमा सिंह, दीपिका पांडेय, एआईसीसी के मेंबर अजय दुबे, जिलाध्यक्ष नरेश वर्मा, मंजू कुमारी समेत प्रदेश कमेटी के पदाधिकारी, जिला के पदाधिकारी समेत 155 प्रतिनिधि शामिल हैं।