गढ़वा।झारखंड का गढ़वा जिला इस साल भीषण सूखे के दौर से गुजर रहा है।पिछले साल जून में 172 मिमी बारिश हुई थी। वहीं इस साल जून में मात्र 26 मिमी बारिश हुई।जुलाई महीने में अब तक 66.3 मिमी यानी मात्र 18 प्रतिशत बारिश हुई। इसका असर भदई और खरीफ दोनों ही फसलों पर पड़ा है। खेती को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई है।किसान मानसून के भरोसे भदई और खरीफ दोनों फसलों का बिचड़ा लगाकर अपनी जमा पूंजी को भी गंवा बैठे हैं। गढ़वा शहर की 90 प्रतिशत आबादी आधा सावन बीत जाने के बाद पीने के पानी को लेकर अपनी दिनचर्या के लिए टैंकर के भरोसे हैं।नगर परिषद का टैंकर जरूरत के हिसाब से शहरवासियों को पानी नहीं पूरा पा रहा है।





नहीं शुरू हुई धान की रोपाई





गढ़वा में इस साल मुख्य खरीफ फसल में धान की रोपाई अभी तक शुरू ही नहीं हुई।जिले में हर साल की तरह इस साल भी 55 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन धान की रोपाई शून्य प्रतिशत हुई।कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्य के 71 प्रतिशत धान का बिचड़ा किया गया है,लेकिन इसमें से खेतों में सिंचाई की व्यवस्था के अभाव में कहीं भी रोपाई शुरू नहीं हो सकी।खेतों में लगी भदई फसलों में मुख्य मक्का की फसल भी प्रभावित हुई है।कृषि विभाग के अनुसार मक्का की बोआई 27200 हेक्टेयर लक्ष्य के होने के बाद 15600 हेक्टेयर में हुई है।बोई गई मक्का की फसल लगातार बारिश की वजह से सूखने की हालत बन गयी है।





दलहन-तेलहन की लगी फसल भी प्रभावित





जिले में इस वर्ष बारिश के अभाव में दलहन और तेलहन की लगी फसल भी प्रभावित हुई है।अरहर, उरद, मूंग और कुलथी को मिलाकर 44800 हेक्टेयर का लक्ष्य के बाद 23355 हेक्टेयर में आच्छादन हुआ।लगातार बारिश नहीं होने और कड़ी धूप निकलने के कारण बोई गई दलहन और तेलहन की स्थिति मरनासन्न हो चुकी है। उसमें फसल होने की आशा क्षीण हो चुकी है।





अक्सर करना पड़ता है अकाल और सूखे का सामना





वैसे तो पूरा पलामू प्रमंडल में बारिश की कमी रहती है। सिंचाई के अभाव में यहां पूरी तरह से खेती बारिश के भरोसे है। जबकि मानसून अक्सर किसानों को धोखा देता रहता है। जिससे यहां हर साल सूखा और प्रत्येक तीन साल पर अकाल की स्थिति रहती है।इस कारण किसान खेती करने से उब चुके हैं।किसान और खेतिहर मजदूर सूखे की स्थिति के कारण बरसात के दिनों में पलायन कर बिहार, यूपी, पंजाब, हरियाणा जैसे दूसरे प्रदेशों में जाकर कृषि कार्य में योगदान देकर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। बारिश की कमी की वजह से यहां की कृषि योग्य 90 प्रतिशत भूमि असिंचित है।





सांसद ने लोकसभा में उठायी आवाज





पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने बुधवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान अपने पलामू संसदीय क्षेत्र में बारिश के अभाव में उत्पन्न सूखे का मामला उठाया। सांसद ने पलामू एवं गढ़वा जिले के साथ-साथ झारखंड राज्य के अन्य जिलों में भी बारिश न होने की बात रखते हुए उत्पन्न हुए सुखाड़ स्थिति से सदन को अवगत कराया। इसमें उन्होंने किसानों को हो रही कठिनाइयों से भी सदन को अवगत कराते हुए उसका इस ओर ध्यान आकृष्ट किया। राज्य में खाद्य संकट के किसी भी प्रभाव को कम करने एवं पशुओं के लिए चारा का प्रबंध करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने पर जोर दिया है।





सांसद ने झारखंड के किसानों को हुई आर्थिक क्षति का आकलन पलामू और गढ़वा जिलों में सुखाड़ से हुए नुकसान का आकलन, राज्य के फसल पैटर्न का विश्लेषण करने और राज्य के वर्षा पैटर्न में बदलाव के चलते वैकल्पिक फसल पैटर्न और विधियों के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करने की मांग की।