नई दिल्ली: देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों कर्नाटक और महाराष्ट्र में किसानों के बढ़ते आक्रोश के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गन्ने की कीमतों, चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य और चीनी मिलों में तौल-रिकवरी में होने वाली धांधली से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य और कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर रमेश चंद को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
आंदोलन के बाद एक्शन में आई सरकार
कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान पिछले कुछ समय से सड़कों पर उतरे हुए हैं। बेलगावी जिले में किसानों ने 13 और 14 अक्टूबर को कोग्नोली टोल प्लाजा पर एनएच-48 (पुणे-कोल्हापुर मार्ग) को बाधित कर दिया था, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
इससे पहले 12 अक्टूबर को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उपभोक्ता मामले एवं खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ किसान प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। हालांकि, वार्ता के तुरंत बाद ठोस फैसला न होने पर किसान नेताओं ने इसे नाकाफी बताया था, जिसके बाद सरकार ने दिए गए आश्वासन पर त्वरित अमल करते हुए दो दिनों के भीतर रमेश चंद के नाम पर मुहर लगा दी।
समिति की संरचना और जांच के 5 मुख्य बिंदु
प्रोफेसर रमेश चंद (जो ICAR-राष्ट्रीय कृषि आर्थिक एवं नीति अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक और 15वें वित्त आयोग के सदस्य रह चुके हैं) के नेतृत्व वाली इस समिति में कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और लीगल मेट्रोलॉजी के संयुक्त सचिव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
यह समिति मुख्य रूप से 5 बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी:
- गन्ने का लाभकारी मूल्य: खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग का मूल्यांकन।
- चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP): मिलों की उत्पादन लागत और वित्तीय स्थिति के आधार पर चीनी के मिल-गेट न्यूनतम विक्रय मूल्य में संशोधन की समीक्षा।
- रिकवरी दर की जांच: चीनी मिलों द्वारा बताई जाने वाली रिकवरी (चीनी प्राप्ति) दर की रिपोर्टिंग और सत्यापन प्रणाली की पारदर्शी समीक्षा।
- तौल प्रक्रिया की निष्पक्षता: चीनी मिलों में गन्ना तौलने वाली कांटों/मशीनों के कैलिब्रेशन और सरकारी निरीक्षण की व्यवस्था।
- मशीनी कटाई पर कटौती: कंबाइन हार्वेस्टर से काटे गए गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती और उससे किसानों के अंतिम भुगतान पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन।
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व्यापक परामर्श के बाद जल्द आएगी रिपोर्ट
यह समिति देश के किसान प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और संबंधित विशेषज्ञों से बातचीत कर व्यापक मसौदा तैयार करेगी। सरकार के अनुसार, समिति बिना किसी अनावश्यक देरी के जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें सक्षम प्राधिकारी को सौंपेगी।
वर्तमान में सरकार ने गन्ने या चीनी के दामों में तुरंत किसी बदलाव का ऐलान नहीं किया है, जिससे किसान संगठन सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे समिति की कार्रवाई पर नजर रखेंगे और यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो पेराई सत्र की शुरुआत के साथ आंदोलन को फिर तेज किया जाएगा। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में करोड़ों किसान और मजदूर इस उद्योग पर निर्भर हैं, ऐसे में रमेश चंद समिति की सिफारिशें पूरे देश के चीनी क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित हो सकती हैं।
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