लखीमपुर खीरी।उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक प्राचीन शिव मंदिर है।मंदिर के परिसर में दो ऐसी समाधियां हैं, जिनकी लंबाई सैकड़ों सालों से रहस्य बनी है।समाधियों के बारे में बताया जाता है कि इन समाधियों की सही नाप अब तक नहीं ली जा सकी है।जब भी नाप ली जाती है, हर बार नया आंकड़ा सामने आता है।कभी एक-दो इंच बढ़ जाती है तो कभी कम हो जाती हैं।दोनों समाधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आसपास के लोगों का कहना है कि शिव मंदिर का यह पूरा परिसर चमत्कारिक है।
मोहम्मदी इलाके में यह प्राचीन शिव मंदिर है।यह पवित्र शिव मंदिर बाबा टेढ़ेनाथ के नाम से विख्यात है।वैसे तो साल भर यहां भोले बाबा के भक्तों की भीड़ लगी रहती है।वहीं सावन में यहां लाखों शिवभक्त आते हैं।बताया जाता है कि इस शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग काफी पुराना है।महाभारतकालीन बताया जाता है। इस मंदिर परिसर के पास ही दो समाधियां बनी हैं।यह समाधियां संतों की हैं।मंदिर में दर्शन पूजन को आने वाले लोग इन समाधियों पर भी जाकर पूजा अर्चना करते हैं।
बाबा टेढ़े नाथ मंदिर के पुजारी प्रेमचंद गिरी बताते हैं कि वैसे तो इन समाधियों की लंबाई छह से सात फीट नजर आती है, लेकिन जब भी इन समाधियों की कोई नाप लेता है तो इनकी लम्बाई सही नहीं आती है।एक तरफ से नापने के बाद जैसे ही दूसरी तरफ से नाप की जाती है एक-दो इंच लम्बाई बढ़ घट जाती है।लोगों ने कई बार नाप ली।कुछ लोगों ने सुबह शाम को नाप ली,लेकिन कभी सही आंकड़ा किसी को नहीं मिल सका।कई बार तो दस मिनट में ही नाप घट-बढ़ जाती है।यह समाधियां कौतूहल का विषय हैं।कोई सही माप नहीं ले सका है।अब इसे चमत्कार कहें या कोई अन्य कारण।फिलहाल यह समाधियां चर्चा का विषय बनी हैं।
लखीमपुर खीरी जिला मुख्यालय से मोहम्मदी जाने पर लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर बाबा टेढ़े नाथ का प्राचीन व प्रसिद्ध मंदिर है।यहां साल भर कांवड़ियों और शिवभक्तों की भीड़ लगी रहती है। इस मंदिर की स्थापना कब हुई, किसने की इसको लेकर कोई प्रामाणिक तथ्य नहीं है।कोई महाभारत कालीन बताता है तो कोई उससे भी पहले का बताता है।बताते हैं कि जंगलों में स्थित इस शिवलिंग पर कांवड़ियों की नजर पड़ी।कांवड़िया कांवड़ भरने के लिए गोमती नदी जा रहे थे। जंगल में शिवलिंग देखा तो पूजा अर्चना शुरू कर दी। इसके बाद धीरे-धीरे यहां मंदिर का निर्माण हुआ।मंदिर के पास ही कुछ दूरी पर दोनों समाधियां स्थित हैं।





