नई दिल्ली: हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर द्वारा दिए गए एक बयान ने भारत-चीन सीमा सुरक्षा और देश की रणनीतिक तैयारियों पर एक नई राष्ट्रीय बहस को जन्म दे दिया है। राजस्थान के अलवर में एक कार्यक्रम के दौरान डीजी कपूर ने स्पष्ट किया कि चीन ने अपनी सेना (PLA) को आधुनिक बनाने पर भारी-भरकम निवेश किया है, ऐसे में केवल पारंपरिक तरीकों के सहारे उसका मुकाबला करना अब बेहद कठिन होगा।

1. ITBP महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर का मुख्य बयान क्या था?

महानिदेशक कपूर ने भारत-चीन सीमा को देश के सबसे कठिन मोर्चों में से एक बताया और निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

  • सैन्य आधुनिकीकरण: चीन ने अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को अत्याधुनिक हथियारों और नई तकनीकों से लैस करने के लिए भारी निवेश किया है।
  • ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक: रूस-यूक्रेन युद्ध का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में ड्रोन एक बहुत बड़ा हथियार और चुनौती दोनों बन चुके हैं। ड्रोन जैसी तकनीकों के माध्यम से एक छोटा देश भी बड़ी सैन्य ताकत को कड़ी टक्कर दे सकता है।
  • बदलती युद्ध शैली: पुरानी युद्ध रणनीतियों पर निर्भर रहकर चीन से पार पाना अब संभव नहीं है, इसलिए सुरक्षा बलों को भी तकनीक के मामले में खुद को अपग्रेड करना होगा।

2. अरुणाचल प्रदेश का सीमाई सच और आमने-सामने की स्थिति

ITBP प्रमुख ने खुलासा किया कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में भारतीय और चीनी जवान आमने-सामने आए हैं और कुछ स्थानों पर यह स्थिति अभी भी बनी हुई है।

  • तनाव और कूटनीतिक प्रयास: हालांकि सितंबर में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (जैसे 6 सितंबर को वाचा-दामाई सीमा बैठक स्थल पर कोर कमांडर स्तर की बातचीत) के बीच तनाव कम करने के प्रयास हुए हैं, लेकिन सीमा पर गश्त और आमने-सामने की स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
  • विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया: इस मामले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि जब चीनी सैनिक स्थापित गश्ती व्यवस्था से हटकर गतिविधियां करते हैं, तो तनाव पैदा होता है। भारत और चीन इस विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों का लगातार उपयोग कर रहे हैं।

3. मोदी सरकार के 12 साल और रक्षा बजट के आंकड़े

ITBP प्रमुख के इस बयान के बाद केंद्र सरकार (मई 2014 से अक्टूबर 2026 तक के 12 वर्षों के कार्यकाल) की रक्षा तैयारियों पर सवाल और चर्चाएं तेज हो गईं हैं। विपक्षी दल (जैसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे) ने भी सरकार से सीमा की स्थिति पर स्पष्टता की मांग की है। हालांकि, सरकार द्वारा रक्षा क्षेत्र में किए गए बड़े वित्तीय निवेश को भी नकारा नहीं जा सकता:

  • रक्षा बजट में वृद्धि: वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 7.85 लाख करोड़ रुपये (तीन गुने से अधिक) हो गया है।
  • पूंजीगत खर्च: वित्त वर्ष 2026-27 में नए हथियारों, लड़ाकू विमानों और सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए पूंजीगत खर्च के तहत लगभग 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • सीमावर्ती बुनियादी ढांचा (BRO): दुर्गम पहाड़ों और अत्यधिक बर्फबारी वाले क्षेत्रों में सैनिकों और रसद की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सड़कें, पुल और सुरंगें बनाई जा रही हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में सीमा सड़क संगठन (BRO) के पूंजीगत खर्च के लिए 7,394 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

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4. चीन से निपटने के लिए ITBP की नई रणनीतिक तैयारियां

भविष्य की चुनौतियों से पार पाने के लिए ITBP ने खुद को बदलना शुरू कर दिया है, जिसके तहत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

  1. ड्रोन प्लाटून और एंटी-ड्रोन सिस्टम: चीन सीमा पर तैनात हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून बनाई गई है। जवानों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही, लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों को शामिल करने की योजना है। कुल मिलाकर बल को मिले 400 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण फंड का 70% हिस्सा ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
  2. 'स्ट्राइक' और 'शौर्य कमांडो' प्रशिक्षण: गलवान घाटी जैसी नजदीकी झड़पों (हाथापाई या पारंपरिक हथियारों के संघर्ष) से निपटने के लिए 'स्ट्राइक' नामक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसे 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, अरुणाचल में सक्रिय भूमिका निभाने वाले 'शौर्य कमांडो' विशेष दस्ते की क्षमता और तैनाती बढ़ाई जा रही है।
  3. सुरक्षा ढांचे का सुदृढ़ीकरण: सीमा चौकियों पर भूमिगत बंकर तैयार किए जा रहे हैं ताकि संघर्ष की स्थिति में जवानों को सुरक्षा मिल सके। अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में बैरकों और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया गया है।

ITBP महानिदेशक का बयान इस बात का साफ संदेश है कि सीमा सुरक्षा कोई एक बार पूरा कर लेने वाला काम नहीं है। जैसे-जैसे चीन अपनी सैन्य ताकत और तकनीक को अपग्रेड कर रहा है, भारत को भी अपनी रणनीति, तकनीकी क्षमता और उपकरणों को लगातार उन्नत करते रहना होगा। आज की तारीख में असली परीक्षा केवल रक्षा बजट के आंकड़ों की नहीं, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों के पास मौजूद आधुनिक संसाधनों और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की है।

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