छत्तीसगढ़ शासन स्तर पर प्रशासनिक कसावट और आम नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी व अत्यावश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में वरिष्ठ सचिवों की एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक संपन्न हुई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए।

अत्यावश्यक सेवा कानून को सख्त बनाने की तैयारी

प्रदेश में अत्यावश्यक सेवाओं के सुचारू संचालन में रुकावट डालने वालों पर नकेल कसने के लिए कानूनी प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाया जा रहा है:

  • संशोधन विधेयक 2026: बैठक के दौरान 'छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण संशोधन विधेयक 2026' के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
  • प्रशासनिक नियंत्रण: समिति ने वर्ष 1979 के पुराने अधिनियम के बिंदुओं की समीक्षा करते हुए अत्यावश्यक जनसेवाओं के दायरे को स्पष्ट करने, प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने और अनुशासन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
  • मुख्य सचिव के निर्देश: मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी और जरूरी सुविधाओं में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। समय की मांग के अनुरूप कानूनी प्रावधानों को प्रभावी बनाते हुए संबंधित विभागों को सभी विधिक और प्रशासनिक औपचारिकताएं जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • बैठक में गृह, विधि, वित्त, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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बिलासपुर के सुपर स्पेशलिटी और कैंसर इंस्टीट्यूट पीपीपी मॉडल पर

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मूल्यांकन समिति (PPPAC) की बैठक में बिलासपुर के कोनी स्थित सिम्स (SIMS) मेडिकल कैंपस से जुड़े एक अन्य बड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई:

  • अस्पतालों का संचालन: कोनी कैंपस में बने 240 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बिस्तरों वाले स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी अब निजी संस्था (प्राइवेट पार्टनर) को सौंपने की तैयारी है।
  • लाइसेंस समझौता: दोनों अस्पतालों को पीपीपी (PPP) मॉडल पर 10 साल के लिए एक ही लाइसेंस समझौते के तहत संचालित किया जाएगा।
  • रक्षण और सुविधाएं: आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों और मुफ्त इलाज के पात्र मरीजों के लिए विशेष बिस्तर आरक्षित रहेंगे, जबकि केवल 20 प्रतिशत बिस्तरों पर भुगतान करने वाले मरीजों का इलाज होगा। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी (हृदय रोग), किडनी और मूत्र रोगों से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

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