जमशेदपुर।झारखंड का लाइफ लाइन माना जाने वाला नेशनल हाईवे 32 चांडिल शहर-बाजार के बीच से गुजरता है। इस पर 24 घंटे छोटे-बड़े वाहन चलते है।यहां दिनभर में एक-दो घंटे नहीं, बल्कि 16 से 18 घंटे जाम लगता है।





दिन शनिवार घड़ी में दोपहर के 1 बजकर 15 मिनट हो रहे हैं। नेशनल हाईवे 32पर चारों तरफ हाॅर्न का शोरगुल,गाड़ियों की लंबी लाइन,तेज धूप और उमस में वैन की खिड़की से झांक रहे बच्चों की आंखें।हर आंख में एक उम्मीद कि शायद अब पहिया आगे बढ़ेगा और वो अपने घर जा सकेंगे।एंबुलेंस के अंदर बैठे मरीज के परिजनों की भी यही हालत है। यह किसी एक दिन या किसी एक समय का नजारा नहीं है।ये नजारा हर रोज देखने को मिलता है।जाम के कारण चांडिल शहर-बाजार में जिंदगी की रफ्तार थमी रहती है।बदस्तूर यह स्थिति बरकरार है।इस हाईवे से व्यवसायी, विद्यार्थी, कामगार और हाकिम भी गुजरते हैं,लेकिन नतीजा सिफर है।रेंगती हुई गाड़ियां इस इलाके की शोभा बन गयी हैं।





प्रबुद्ध नागरिक सुरेश खेतान बताते है कि हर रोज जाम व कोलाहल से सुबह शुरू होती है और जाम व कोलाहल के साथ ही रात ढलती है‌। हमारी जिंदगी नरक बन चुकी है।कोई भी हमारी समस्या के समाधान का प्रयास नहीं कर रहा है।





जमीन अधिग्रहण की पेंच में फंसी बाइपास योजना





वर्ष 2015-16 में चांडिल के घोड़ानेगी स्थित नेशनल हाईवे 33 से नीमडीह के पितकी तक नेशनल हाईवे 32 बाईपास सड़क की स्वीकृति दी गयी।छह-सात वर्ष बाद भी सड़क अधूरी है। बाईपास सड़क के लिए करीब नौ मौजा से जमीन अधिग्रहण होना था।पांच मौजा में जमीन की उचित कीमत तय नहीं होने से बाधा आयी है। लगभग 28 किलोमीटर लंबी बाईपास सड़क में आधा का निर्माण किया गया है,जबकि आधा कार्य अधूरा पड़ा है। रैयतदार अरूप महतो ने कहा कि बाईपास में हमारी जमीन जा रही है।जमीन की मुआवजा राशि वितरण में समानता नहीं है।चांडिल बाजार से सटे लेंगडीह गांव और चांडिल मौजा की मुआवजा दर में फर्क है। चांडिल मौजा में प्रति डिसमिल 88,000 रुपए मुआवजा दर तय है, जबकि लेंगडीह में प्रशासन 16,696 रुपए ही दे रहा है।इससे पांच मौजा के लोग अपनी जमीन नहीं देना चाह रहे हैं।इसे लेकर समस्या का समाधान नहीं निकल रहा है।





इन गांवों में भूमि अधिग्रहण बाकी : चांडिल के लेंगडीह, घोड़ानेगी, राउताड़ा, नीमडीह के बुरुडुंगरी और उगडीह





इन गांवों में भूमि अधिग्रहण पूरा : चांडिल के चांडिल, रुचाव, गांगूडीह, नीमडीह के पितकी





त्रिपक्षीय वार्ता में सहमति बनी,पर मुकरा एनएचएआई





लेंगडीह के उमापद महतो ने बताया कि मुआवजा को लेकर अनुमंडल में कैंप का आयोजन किया गया था।समान दर पर मुआवजा देने को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता हुई।तय हुआ परंतु तीन वर्ष बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया है।बैठक में हुए निर्णय से एनएचएआई खुद मुकर गया।





क्या कहते हैं अधिकारी और अन्य





नेशनल हाईवे 32 पर बाईपास सड़क बनने से चांडिल में जाम की स्थिति नहीं रहेगी।रैयतों को जनहित और क्षेत्र के विकास में प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। बाइपास सड़क बनने से रैयतों को लाभ होगा।





अरवा राजकमल, उपायुक्त





बाइपास सड़क बने यह सभी चाहते हैं।चांडिल क्षेत्र के लोगों की बाइपास निर्माण की मांग पुरानी है,लेकिन रैयतों को अपनी जमीन का भी उचित मुआवजा मिलना जरूरी है।





धीरेन महतो, रैयत, रावतारा चांडिल





चांडिल बाजार में जाम से लेाग परेशान हैं।प्रेशर हॉर्न से परेशानी होती है।प्रशासन जल्द निर्णय लेकर पांच मौजा के रैयतदारों को जल्द उचित मुआवजा भुगतान करे।बाइपास सड़क निर्माण जल्द जरूरी है।सुरेश खेतान, प्रबुद्ध नागरिक चांडिल निवासी