रांची।झारखंड पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नीरज सिन्हा ने 76वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण किया। डीजीपी ने पुलिस मुख्यालय में पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड पुलिस नक्सलियों के खिलाफ लगातार प्रभावी अभियान चला रही है।जिसके परिणामस्वरूप 2019 से 2022 के बीच कुल 1,526 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है, इसके अलावा विभिन्न मुठभेड़ों में कुल 51 नक्सली मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार नक्सलियों में एक पोलित ब्यूरो सदस्य, एक केंद्रीय समिति सदस्य, तीन विशेष क्षेत्र समिति सदस्य, एक क्षेत्रीय समिति सदस्य, 12 जोनल कमांडर, 30 सब-जोनल कमांडर और 61 एरिया कमांडर शामिल हैं।
भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद
डीजीपी सिन्हा ने कहा कि नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद और नक्सलियों द्वारा वसूले गए लगभग 159 लाख रुपये जब्त किए गए हैं।उन्होंने कहा कि बरामद किए गए हथियारों और गोला-बारूद में 136 पुलिस हथियार, 40 नियमित हथियार, 590 देशी हथियार शामिल हैं जिनमें 74 पुलिस हथियार शामिल हैं। 37,541 कारतूस, 1,048 आईईडी और 9,616 डेटोनेटर हैं।
डीजीपी सिन्हा ने कहा कि नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए तैयार की गई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के भी सकारात्मक परिणाम मिले हैं,क्योंकि 57 शीर्ष नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं।अपने भाषण के दौरान राज्य में साइबर अपराध को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया।
डीजीपी सिन्हा कहा कि उग्रवादी समूहों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राज्य में एक साइबर निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया गया है।झारखंड में एक टोल फ्री साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया गया है।
3000 से ज्यादा साइबर अपराधी भी गिरफ्तार
डीजीपी सिन्हा ने कहा कि साइबर अपराधियों ने 2019 से जून 2022 तक लोगों से 4.48 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की और राज्य में कुल 3,001 साइबर अपराधियों को इस अवधि के दौरान गिरफ्तार किया गया।उन्होंने कहा कि उनके पास से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, क्लोन मशीन, स्वाइप कार्ड, वाहन और नकदी बरामद की गई।
डीजीपी सिन्हा ने कहा कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए सभी 24 जिलों में मानव तस्करी रोधी यूनिट स्थापित की गई है।राज्य में 2019 से 2022 के बीच मानव तस्करी से जुड़े कुल 329 मामले सामने आए हैं। तस्करी के कुल 779 पीड़ितों को बचाया गया है।
521 पुलिस थानों को सीसीटीएनएस से जोड़ा गया
डीजीपी सिन्हा ने पुलिस आधुनिकीकरण की बात करते हुए कहा कि राज्य के 521 पुलिस थानों को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से थानों में एफआईआर की ऑनलाइन प्रविष्टि की जा रही है।
डीजीपी सिन्हा ने कहा कि झारखंड ऑनलाइन एफआईआर सिस्टम (जेओएफएस) शुरू किया गया है।जिसके तहत अब तक कुल 1,00,473 मामले प्राप्त हुए हैं।जिनमें से 84,571 मामलों का निपटारा किया गया है और कुल 15,902 मामले लंबित हैं और 2,869 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है।
डायल 112 की शुरुआत
डीजीपी सिन्हा ने कहा कि झारखंड पुलिस आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) परियोजना के तहत पुलिस (डायल 100), फायर (डायल 101) और एम्बुलेंस (डायल 108) सेवाओं को सफलतापूर्वक एकीकृत करके डायल 112 लागू कर रही है। राज्य में किसी भी घटना या दुर्घटना की स्थिति में लोग 112 नंबर डायल करके चौबीसों घंटे पुलिस, अग्निशमन और एम्बुलेंस आदि जैसी आपातकालीन सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।





