रांची।झारखंड में अब राजस्थान की तरह पुरानी पेंशन को लागू करने के लिए विधानसभा में मांग उठी है।इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन योजना पर नफा-नुकसान का आकलन करने के बाद विचार करेगी।उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णय से सदन को अवगत कराया जाएगा।यह ध्यानाकार्षण कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने लाया था।

दीपिका पांडेय ने कहा कि 1.90 लाख कर्मी कार्यरत हैं। 1.25 लाख कर्मी 2004 के बाद से सरकारी सेवा में हैं। क्या सरकार राजस्थान की तरह पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने का विचार रखती है। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार को सभी की चिंता है। आम नागरिकों के साथ सरकारी कर्मियों के प्रति भी सरकार की चिंताएं हैं। जहां तक बात पुरानी पेंशन योजना लागू को लेकर है, तो इस पर समेकित रूप से विचार किया जाएगा।

सीएम हेमंत ने कहा कि नफा-नुकसान भी बहुत बड़ा विषय है। समेकित रूप से नफा-नुकसान के आकलन के बाद ही इसपर कोई विचार होगा। कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि नई पेंशन योजना में कई खामियां हैं। कर्मचारियों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार इस पर विचार करे।

सीएम हेमंत से पहले वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार ने एक अप्रैल 2004 से और राज्य सरकार ने एक अप्रैल 2012 के बाद से नई पेंशन नीति लागू की है।सेवानिवृत्ति के बाद जीपीएस, ग्रेच्युटी, 300 दिन तक के ईएल पर टैक्स नहीं लगता। पेंशन को आय माना जाता है, इसलिए इस पर टैक्स लगता है। पुरानी पेंशन में दस साल बाद जीपीएस फंड से राशि निकालने का प्रावधान है जबकि नई पेंशन में तीन साल बाद इसकी सुविधा दी गई है।

संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि राज्य प्रशासनिक एवं अन्य सेवा संवर्ग के अधिकारियों की प्रोन्नति पर लगी रोक जल्द हटाने पर निर्णय लिया जाएगा। हर साल दिसंबर माह में विभागीय प्रोन्नति कमेटी की बैठक करके अगले साल होने वाली प्रोन्नति के लिए पैनल तैयार कर ससमय प्रोन्नति कराने का प्रावधान है।
उन्होंने यह जानकारी विधायक लंबोदर महतो के ध्यानाकर्षण पर दिया। विधायक ने कहा कि पदाधिकारियों और कर्मियों को ससमय प्रोन्नति नहीं दी जा रही है। विभागीय प्रोन्नति समिति की वर्ष में दो बार बैठक होनी चाहिये, लेकिन नहीं हो पा रही है। सरकार ने 24 दिसंबर 2020 को कार्मिक विभाग के माध्यम से राज्य के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों की प्रोन्नति पर रोक लगा दी।

14 महीने हो गये अब तक यह रोक नहीं हटाई गई है। हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को अपने निर्णय में सरकार के इस आदेश को गलत और असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया और चार हफ्ते में प्रोन्नति देने का आदेश दिया, लेकिन अब तक प्रोन्नति नहीं दी गई है। अब मामला हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का बन रहा है।उन्होंने कहा कि राज्य के विकास को गति देने के लिए राज्य प्रशासनिक और अन्य सेवा संवर्गों को ससमय प्रोन्नति देकर मजबूत करने की मांग की।

सीएम हेमंत ने विपक्षी पार्टी भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि राज्य में करीब 20 वर्षों तक उनका शासन रहा। इतने वर्षों के शासन के बाद पिछली सरकार में मुख्यमंत्री रघुवर दास के समय राजमहल की खासमहाल भूमि को लीज की जगह फ्री होल्ड करने के लिए केवल समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर 2019 को गठित इस समिति के समक्ष तीन वर्षों यानि 22 सितंबर 2022 तक आवेदन आने हैं। आवेदन के आधार पर लोगों की चिंता के मुताबिक केवल साहिबगंज ही नहीं पूरे राज्य में जहां भी खासमहाल की भूमि है, उसे फ्री-होल्ड करने पर सामयिक निर्णय लिया जाएगा। सरकार आवासीय के साथ व्यावसायिक भूमि को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर चिंता कर रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में ये जानकारी भाजपा विधायक अनंत ओझा के ध्यानाकार्षण प्रस्ताव पर दिया। विधायक ओझा ने कहा की वह वर्षों से राजमहल में खासमहाल जमीन को लीज की जगह फ्री होल्ड करने का मामला सदन में ला रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। पिछले बजट सत्र में भी मुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने कहा था कि इस मामले का जल्द निपटारा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एसपीटी एक्ट के तहत पीएम आवास के तहत करीब 400 आवासों का निर्माण बंद करा दिया गया है। इस पर सरकार संज्ञान ले।