वाशिंगटन:

अमेरिका में आगामी मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सरकारी धोखाधड़ी और फेडरल फंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बेहद आक्रामक योजना का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग में 'फ्रॉड व्हिसलब्लोअर इंसेंटिव प्रोग्राम' (Fraud Whistleblower Incentive Program) की घोषणा की गई, जिसका कुल बजट 2.5 करोड़ डॉलर (लगभग ₹236.83 करोड़) रखा गया है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों और पत्रकारों को सरकारी विभागों में होने वाले भ्रष्टाचार, वित्तीय धोखाधड़ी और टैक्सपेयर्स के पैसे की हेराफेरी की जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करना है।

कैसे काम करेगा यह व्हिसलब्लोअर प्रोग्राम?

व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस योजना का संचालन अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) द्वारा किया जाएगा:

  • 30,000 डॉलर तक का इनाम: यदि किसी व्यक्ति द्वारा दी गई सटीक जानकारी के आधार पर फेडरल कार्रवाई होती है या दोषी को सजा मिलती है, तो वह 30,000 डॉलर तक की राशि का हकदार होगा।
  • 1% कमीशन की व्यवस्था: राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि दी जाने वाली इनाम राशि उजागर हुई धोखाधड़ी की कुल राशि का 1 प्रतिशत कमीशन होगी।
  • ट्रंप करेंगे खुद फैसला: यदि किसी एक ही धोखाधड़ी के मामले में एक से अधिक लोग जानकारी देने का दावा करते हैं, तो राष्ट्रपति खुद मध्यस्थता कर तय करेंगे कि इनाम किसे मिलेगा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि पत्रकार भी इस योजना का हिस्सा बन सकते हैं।

जेडी वेंस की अगुवाई में टास्क फोर्स

सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं को खत्म करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने मार्च में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया था, जिसकी कमान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को सौंपी गई थी।

वेंस ने अपनी टास्क फोर्स के काम को टैक्सपेयर्स के पैसे की चोरी रोकने का एक प्रभावी जरिया बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग सरकार की मदद से टैक्सपेयर्स का

पैसा चुरा रहे हैं, उन्हें रोकना बेहद जरूरी है, और इसमें मदद करने वाले नागरिकों को मिलने वाले फायदों में हिस्सा दिया जाएगा।

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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर का जिक्र और विवाद

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा दक्षिणपंथी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर निक शर्ली (24) को 10,000 डॉलर का चेक देने की बात भी चर्चा में रही। शर्ली ने मिनेसोटा में सोमाली समुदाय द्वारा चलाए जा रहे फर्जी चाइल्डकेयर सेंटरों के जरिए फेडरल सब्सिडी के दुरुपयोग का दावा करते हुए एक वीडियो शेयर किया था, जिसके बाद जांच और गिरफ्तारियां हुई थीं। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों की मौजूदगी में उन्हें कोई चेक नहीं दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिड-टर्म चुनावों से ठीक पहले इस योजना को लाकर ट्रंप प्रशासन आम जनता के बीच भ्रष्टाचार विरोधी छवि बनाने और जनता को सीधा लाभ पहुंचाने का संदेश देने की कोशिश कर रहा है।

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