कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर चिड़ियाघर के अंदर लोहे के गेट पर चेतावनी लिखी है,आगे जाना मना है।चिड़ियाघर आने वाले हर दर्शक को ये चेतावनी अचंभित कर देती है। आखिर अचंभित हो भी क्यों न,चेतावनी लिखी इस कोठरी में हत्या की कोशिश करने के तीन खूंखार गुनहगार तेंदुए कैद हैं।ये तेंदुए 25 लोगों पर जानलेवा हमला कर चुके हैं।





मेरठ, प्रतापगढ़ और मुरादाबाद में आतंक का पर्याय बने इन खतरनाक तेंदुओं को घंटों कड़ा अभियान चलाकर पकड़ा गया था।इसके बाद कानपुर चिड़ियाघर लाया गया था और सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।अब ये तेंदुए पांच बाई पांच की कोठरी में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।लंबे समय तक कैद में रहने के बाद भी तेंदुओं के स्वभाव में कोई बदलाव नहीं आया है।







खूंखार है मुराद





मुरादाबाद के अगवानपुर के जंगल में 2018 में तेंदुए ने अपनी बादशाहत कायम कर रखी थी।तेंदुए ने क्षेत्र में लगभग सात लोगों पर हमला कर घायल कर दिया था।शिकारियों ने नीलगाय को पकड़ने के लिए जाल लगाए थे,लेकिन जाल में खूंखार तेंदुए का पैर उलझ गया था। तेंदुए ने जाल से निकलने की पूरी कोशिश की,लेकिन निकल नहीं सका,जिससे पैर और मुंह में चोट भी लग गई थी।तेंदुए को देखने के लिए भारी संख्या में भीड़ जुट गई थी।डॉ. आर के सिंह के नेतृत्व में 21 जनवरी 2018 को तेंदुए को कानपुर चिड़ियाघर लाया गया। मुरादाबाद में पकड़े जाने की वजह से तेंदुए का नाम मुराद रखा गया।





जानें सम्राट की दास्तां





मेरठ में अप्रैल 2016 में तीन साल की उम्र में 13 लोगों पर हमला करने का गुनहगार तेंदुए को पकड़ने के लिए पुलिस के साथ सेना के 200 से अधिक जवान लगाने पड़े थे। रेस्क्यू विशेषज्ञ के रूप में कानपुर चिड़ियाघर से तत्कालीन पशुचिकित्सक डॉ. आरके सिंह पहुंचे थे। ट्री गार्ड का कवचनुमा खोल पहन कबाड़ हटाने पर कुर्सी के पीछे तेंदुए का मात्र एक रोजेट (खाल पर बने काले धब्बे) ही दिखा। ट्रेंकुलाइजर का निशाना तो सटीक लगा,लेकिन तेंदुआ आंखों से ओझल हो गया।डाॅ. आरके सिंह संभल पाते कि इससे पहले तेंदुए के पंजे के वार से बाएं हाथ का अंगूठा कट गया।जिसमें आठ टांके लगे।बरहाल दवा ने अपना असर दिखाया और तेंदुआ बेहोश हो गया। 15 अप्रैल 2016 को कानपुर चिड़ियाघर आने पर तेंदुए का नाम सम्राट रखा गया।इसे पकड़ने में 51 घंटे लगे थे।





जानें क्यों पड़ा प्रताप नाम





प्रतापगढ़ जिले के कुंडा के बाघराय बाजार में जनवरी 2018 में कहीं से भटकर पहुंचे खूंखार तेंदुए ने 13 लोगों पर हमला कर जान लेने की कोशिश की थी।रेस्क्यू के लिए कानपुर चिड़ियाघर से टीम बुलाई गई थी।डॉ.नासिर ने बताया कि लंबी छलांग लगाने में माहिर तेंदुआ लोगों को घायल करने के बाद रात आठ बजे बाघराय बाजार के भूसे भरे कमरे में घुस गया था। देर रात एक बजे रेस्क्यू टीम ने तेंदुए को काबू करने के लिए लकड़ी के दरवाजे में दो छेद करवाया और ट्रैंकुलाइजर गन से निशाना साधा।डार्ट लगने से तेंदुए हमलावर हो गया। बेहोश होने तक दरवाजे पर पंजे मारता रहा।खौफ की वजह से बेहोशी के बाद भी तेंदुए को जाल में बांधकर पिंजरे में डाला गया। तेंदुए को 14 नवंबर 2017 कोे कानपुर चिड़ियाघर लाया गया। प्रतापगढ़ में पकड़े जानें की वजह से तेंदुए का प्रताप नाम पड़ गया।





आपको बता दें कि प्रतापगढ़ से आए प्रताप पर 13,मुरादाबाद के मुराद पर 7 मामले हैं।तीनों तेंदुए 15 हजार के डॉट इंजेक्शन लगे तब पकड़े गए थे। तीनों चिड़ियाघर की कोठरी में बंद है।बाहर लिखा है आगे जाना मना है। मेरठ का सम्राट 6 साल से तन्हाई में कैद हैं। सम्राट इंसान देखते ही आक्रामक हो जाता है।