लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ अपने आप में अद्भुत है।इमामबाड़ा राजधानी की खूबसूरती पर चार चांद लगाता है। लखनऊ-नई दिल्ली नेशनल हाईवे-24 पर स्थित बख्शी का तालाब कस्बे से 11 किलोमीटर दूर कठवारा गांव में मां चन्द्रिका देवी का मंदिर है।गोमती नदी के पास महीसागर संगम तीर्थ के तट पर एक पुरातन नीम के वृक्ष के कोटर में नौ दुर्गाओं के साथ उनकी वेदियां चिरकाल से सुरक्षित रखी हुई हैं।मां लखनऊ की कुलदेवी है।लखनऊ में किसी का भी कोई भी शुभ कार्य होता है तो सबसे पहले वो मां चंद्रिका देवी के ही दर्शन करता है।मंदिर के बारे में बताया जाता है कि इसकी स्थापना कब हुई इसकी सटीक जानकारी किसी के पास नहीं है।मां यहां पर खुद प्रकट हुई थीं।पहले यहां नीम का खोखला पेड़ था।उसी खोखले पेड़ से यहां पर देवी मां प्रकट हुई हैं।यहां पर दुर्गा जी की 9 पिंडी हैं।नवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से पुख्ता तैयारियां की गई हैं।





5000 से अधिक भक्त करते हैं मां का दर्शन





नवरात्रि के दिनों में जिन नौ देवियों को पूजा जाता है।उनकी पिंडियां यहां पर मौजूद हैं।इस मंदिर में दर्शन करने के लिए न सिर्फ लखनऊ बल्कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भी लोग मां के दरबार में आते हैं और मन्नत मांगते हैं और चुनरी की गांठ बांधते हैं।मन्नत पूरी होने पर माँ को चुनरी, प्रसाद चढ़ाकर मंदिर परिसर में घण्टा बांधते हैं।अमीर हो या गरीब, अगड़ा हो या पिछड़ा, मां के दरबार में सभी को समान अधिकार है।यहां पर बच्चों के मुंडन की भी मान्यता है।जो भी अपने बच्चे का यहां पर मुंडन करवाता है, उनका बच्चा कभी बीमार नहीं होता।नवरात्रि के अवसर पर यहां पर विशाल मेला लगता है। 5000 से भी अधिक भक्त प्रतिदिन 9 दिनों तक यहां पर मां का दर्शन करते हैं।आम दिनों में भी यहां पर भक्तों की अच्छी लाइन दर्शन करने के लिए लगी रहती है।दर्शन करने के लिए मां के अलावा शिवलिंग और भैरव बाबा विराजमान हैं।उनकी भी पूजा अर्चना की जाती है।एक विशाल हवन कुण्ड, यज्ञशाला,बर्बरीक द्वार, सुधन्वा कुण्ड, महीसागर संगम तीर्थ के घाट आदि आज भी दर्शनीय हैं।





जानिए कब खुलता है मंदिर





चंद्रिका देवी मंदिर नवरात्रि के दिनों में 4:00 बजे खुल जाता है,और रात में 10:00 बजे बंद होता है।आम दिनों में 5:00 बजे खुलता है और रात के 10:00 बजे बंद होता है।आरती का समय यहां पर सुबह 7:00 बजे है, लेकिन नवरात्रि में सुबह 6:00 बजे आरती होती है।रात में आरती का समय 8:00 बजे ही है।यहां पर ऑनलाइन दर्शन की कोई भी व्यवस्था नहीं है।





स्कन्द पुराण के अनुसार द्वापर युग में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने माँ चन्द्रिका देवी धाम स्थित महीसागर संगम में तप किया था। चन्द्रिका देवी धाम की तीन दिशाओं उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में गोमती नदी की जलधारा प्रवाहित होती है तथा पूर्व दिशा में महीसागर संगम तीर्थ स्थित है। जनश्रुति है कि महीसागर संगम तीर्थ में कभी भी जल का अभाव नहीं होता और इसका सीधा संबंध पाताल से है। आज भी करोड़ों भक्त यहां महारथी वीर बर्बरीक की पूजा-आराधना करते हैं।





मान्यता है कि दक्ष प्रजापति के श्राप से प्रभावित चन्द्रमा को भी श्रापमुक्ति के लिए इसी महीसागर संगम तीर्थ के जल में स्नान करने के लिए चन्द्रिका देवी धाम में आना पड़ा था।त्रेता युग में लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) के अधिपति उर्मिला पुत्र चन्द्रकेतु को चन्द्रिका देवी धाम के तत्कालीन इस वन क्षेत्र में अमावस्या की अर्धरात्रि में जब भय व्याप्त होने लगा तो उन्होंने अपनी माता द्वारा बताई गई नवदुर्गाओं का स्मरण किया और उनकी आराधना की। तब चन्द्रिका देवी की चन्द्रिका के आभास से उनका सारा भय दूर हो गया था।





महाभारत काल में पांचों पाण्डु पुत्र द्रोपदी के साथ अपने वनवास के समय इस तीर्थ पर आए थे।युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ कराया जिसका घोड़ा चन्द्रिका देवी धाम के निकट राज्य के तत्कालीन राजा हंसध्वज द्वारा रोके जाने पर युधिष्ठिर की सेना से उन्हें युद्ध करना पड़ा। युद्ध में उनका पुत्र सुरथ तो सम्मिलित हुआ, लेकिन दूसरा पुत्र सुधन्वा चन्द्रिका देवी धाम में नवदुर्गाओं की पूजा-आराधना में लीन था और युद्ध में अनुपस्थित‍ि के कारण इसी महीसागर क्षेत्र में उसे खौलते तेल के कड़ाहे में डालकर उसकी परीक्षा ली गई। मां चन्द्रिका देवी की कृपा के चलते उसके शरीर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तभी से इस तीर्थ को सुधन्वा कुण्ड भी कहा जाने लगा। युधिष्ठिर की सेना अर्थात कटक ने यहां वास किया तो यह गांव कटकवासा कहलाया। आज इसी को कठवारा कहा जाता है।





हिन्दी साहित्य के उपन्यास सम्राट स्व. अमृतलाल नागर ने अपने उपन्यास करवट में चन्द्रिका देवी की महिमा का बखान किया जिसमें उपन्यास का नायक बंशीधर टंडन चौक इलाके से देवी को प्रसन्न करने के लिए हर अमावस्या को चन्द्रिका देवी के दर्शन करने आता था। आज भी अमावस्या के दिन और उसकी पूर्व संध्या को मां चन्द्रिका देवी के दर्शनार्थियों में सर्वाधिक संख्या लखनऊ के चौक क्षेत्र के देवीभक्तों की होती है।स्थानीय लोगों का कहना है कि आस्था और विश्वास से जुड़े पौराणिक महीसागर संगम तीर्थ को राजस्व विभाग के अभिलेखों में पांच एकड़ क्षेत्र वाले सामान्य ताल के नाम से अंकित किया गया है। स्थानीय लोगों और भक्तों का कहना है कि इस पौराणिक तीर्थ को सरकार अपने अभिलेखों में दर्ज कराए।