यरुशलम

इज़राइल में हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव में भारी मतदान के बाद राजनीतिक परिदृश्य में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिल रहा है। शुरुआती मतगणना और रुझानों के अनुसार, देश की दो प्रमुख अरब पार्टियां संसद (नेसेट) में रिकॉर्ड सीटें हासिल करने की राह पर हैं। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही ये पार्टियां नई सरकार के गठन में निर्णायक 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने की स्थिति में आ गई हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यूसुफ जबरीन के नेतृत्व वाली 'जॉइंट लिस्ट' (Joint List) और मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली 'रा'आम' (Ra'am) मिलकर लगभग 19 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती हैं। यह आंकड़ा नेसेट में उनकी मौजूदा उपस्थिति से लगभग दोगुना है, जिसने इज़राइल के पारंपरिक राजनीतिक गणित को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है।

राजनीतिक रुख: जॉइंट लिस्ट बनाम रा'आम पार्टी

चुनावी नतीजों के इस नए समीकरण पर दोनों प्रमुख अरब गुटों का दृष्टिकोण अलग-अलग देखने को मिल रहा है:

1. जॉइंट लिस्ट का रुख (यूसुफ जबरीन)

अरब-बहुल जॉइंट लिस्ट के प्रमुख यूसुफ जबरीन ने स्पष्ट किया कि उनकी संभावित 12 सीटें बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने और देश की राजनीतिक दिशा बदलने में काम आएंगी।

  • सीधा मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार: जबरीन ने कहा कि वे आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में सीधे शामिल नहीं हो सकते, क्योंकि आइज़ेनकोट ने गाजा में सैन्य अभियानों और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे का समर्थन किया था।
  • बाहरी समर्थन का विकल्प खुला: हालांकि, उन्होंने विश्वास मत के दौरान बाहर से आइज़ेनकोट गुट को समर्थन देने की संभावना को खारिज नहीं किया है।
  • प्रमुख मांगें: उम्म अल-फहम स्थित अपने आवास से बात करते हुए जबरीन ने कहा, "हमारे पास अपने समुदाय की सुरक्षा, नागरिक अधिकारों की रक्षा और समानता को बढ़ावा देने की स्पष्ट मांगें हैं।"

2. रा'आम पार्टी की व्यावहारिक नीति (मंसूर अब्बास)

दूसरी तरफ, रा'आम (Ra'am) के नेता मंसूर अब्बास ने अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है।

  • उन्होंने एक पूर्व यहूदी पुलिस अधिकारी को अपनी उम्मीदवार सूची में शामिल करके गठबंधन के दायरे को व्यापक बनाया है।
  • अब्बास ने आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा बनने की इच्छा जताई है।
  • मंसूर अब्बास के अनुसार, चुनाव से पहले ही आइज़ेनकोट गुट के वरिष्ठ सदस्यों और यहाँ तक कि दक्षिणपंथी खेमे के एक बहुत ही वरिष्ठ नेता ने भी उनसे सरकार गठन को लेकर संपर्क किया था।

प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिक्रिया और आरोप

अरब पार्टियों के इस उभार ने इज़राइल के पारंपरिक यहूदी राजनीतिक दलों में हलचल पैदा कर दी है:

  • गैडी आइज़ेनकोट का रुख: चुनाव प्रचार के दौरान आइज़ेनकोट ने साझा लोकतांत्रिक और यहूदी मूल्यों की कमी का हवाला देते हुए किसी भी अरब पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया था।
  • लिकुड पार्टी और नेतन्याहू का कड़ा रुख: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड (Likud) पार्टी ने किसी भी अरब दल से बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। लिकुड प्रवक्ता गाइ लेवी ने यरुशलम मुख्यालय से कहा, "ऐसा होने का कोई सवाल ही नहीं उठता।"
  • धांधली के आरोप: चुनाव परिणाम सामने आते ही प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनकी पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है।

इज़राइल में अरब नागरिक और उनकी सामाजिक भूमिका

इज़राइल की कुल आबादी में अरब नागरिकों (जिनमें से कई खुद को अरब-इज़राइली या इज़राइल के फिलिस्तीनी नागरिक कहते हैं) की हिस्सेदारी 20% (लगभग 21 लाख) है। यह समुदाय देश के ढांचागत और सामाजिक क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण योगदान देता है:

क्षेत्र / पदअरब समुदाय की भागीदारी / योगदान
चिकित्सक (Doctors)कुल डॉक्टरों में 20% से अधिक
स्वास्थ्य कर्मी (Nurses & Pharmacists)लगभग 25% नर्सें और 50% लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्ट
न्यायपालिका (Judiciary)दो अरब नागरिक इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट में जज रह चुके हैं
अन्य क्षेत्रइंजीनियरिंग, शिक्षा, साहित्य और खेल जगत में भी सक्रिय भूमिका

पृष्ठभूमि: अरब राजनीति का बदलता स्वरूप

क्या है जॉइंट लिस्ट और रा'आम?

  • जॉइंट लिस्ट (Joint List): 2015 में गठित अरब-बहुसंख्यक पार्टियों (जैसे अहमद तिबी की Ta'al और Hadash) का एक गठबंधन है। यह धर्मनिरपेक्ष, वामपंथी और राष्ट्रवादी विचारों का प्रतिनिधित्व करता है, जो नागरिक समानता और अरब क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण की मांग करता है।
  • मंसूर अब्बास और रा'आम (Ra'am): 52 वर्षीय डेंटिस्ट से राजनेता बने मंसूर अब्बास 2019 में संसद पहुंचे। उन्होंने इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष को वार्ता की मुख्य शर्त बनाने के बजाय अरब नागरिकों के घरेलू मुद्दों (जैसे नगर पालिका फंडिंग, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, अपराध नियंत्रण) पर ध्यान केंद्रित किया।

ऐतिहासिक संदर्भ

दशकों तक अरब पार्टियां सरकार को केवल बाहर से समर्थन देती थीं और कैबिनेट में उनका प्रतिनिधित्व बेहद सीमित (जैसे सलाह तारीफ, रालेब मजादेले आदि) था। हालांकि, 2021 में बड़ा बदलाव आया जब अब्बास की पार्टी रा'आम नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड की सत्ताधारी गठबंधन सरकार का हिस्सा बनी।

अब, चुनाव नतीजों के इस नए दौर में इज़राइली राजनीति का ऊंट किस करवट बैठता है और क्या अरब पार्टियां एक बार फिर इतिहास रचेंगी, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

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