वाशिंगटन डी.सी. / नई दिल्ली:
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में होने वाले आगामी मिड-टर्म चुनाव (Mid-term Elections) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होने जा रहे हैं। आगामी 3 नवंबर को अमेरिकी कांग्रेस की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों के लिए होने वाले ये चुनाव तय करेंगे कि व्हाइट हाउस के फैसलों पर कितना विधायी नियंत्रण रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट और कांग्रेस में बहुमत हासिल करने में सफल रहती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप की मनमानी पर बड़ा अंकुश लग सकता है और उनके खिलाफ महाभियोग (Impeachment) का खतरा भी बढ़ सकता है।
ईरान युद्ध और महंगाई का साया: मतदाताओं के मुख्य मुद्दे
ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान-इजरायल तनाव में अमेरिका के कूदने के बाद से भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। होर्मुज स्ट्रेट (Storm of Hormuz) के प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूते हुए 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
- आम अमेरिकी की मुश्किलें: बेलगाम बढ़ती महंगाई, पेट्रोल की ऊंची कीमतें और आसमान छूती लागत ने आम नागरिकों की जेब पर भारी दबाव बना दिया है।
- साइलेंट वोटर: हालांकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के आंकड़े अन्य देशों से बेहतर हैं, लेकिन ईरान युद्ध और आर्थिक मार के कारण ट्रंप का समर्थन करने वाला एक बड़ा वर्ग अब खामोश (Silent) हो गया है। ट्रंप के कट्टर समर्थक भी नीतियों से आहत होकर असमंजस में हैं।
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'MAGA' का नारा और प्रवासियों का मुद्दा
बोस्टन के वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र सिंह के अनुसार, अमेरिका में अभी भी ट्रंप की नीतियों (खासकर 'अमेरिका फर्स्ट' और 'MAGA' - Make America Great Again) का एक मजबूत आधार है। अमेरिकियों का एक वर्ग प्रवासियों को अपनी संस्कृति और श्वेत आबादी के लिए बड़ा खतरा मानता है।
दूसरी ओर, पूंजीपतियों और उद्योगपतियों (जैसे एलन मस्क) का एक बड़ा वर्ग ट्रंप के पक्ष में पानी की तरह पैसा बहा रहा है, ताकि उनका कैपिटलिस्टिक (पूंजीवादी) एजेंडा आगे बढ़ता रहे। इसके विपरीत, डेमोक्रेट्स सोशलिस्ट एजेंडा और बढ़ती महंगाई को हथियार बनाकर सत्ता में वापसी की फिराक में हैं।
बराक ओबामा की सक्रियता और डेमोक्रेट्स की रणनीतियां
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा हाल ही में ओहियो और मिशिगन जैसे राज्यों में रैलियां कर डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं। ओबामा खुलेआम ट्रंप प्रशासन पर अराजकता, भ्रष्टाचार और अनावश्यक ईरान युद्ध में उलझने का आरोप लगा रहे हैं।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि ओबामा का यह प्रचार स्विंग वोटर्स को आकर्षित करने में मदद कर सकता है, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर मजबूत नेतृत्व के अभाव के कारण केवल इस एक कारक से रिपब्लिकन को बड़ा झटका लगेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी।
लूला की जीत और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर
ब्राजील में कम्युनिस्ट नेता लुइज इनासियो लुला दा सिल्वा (Luiz Inácio Lula da Silva) की चौथी बार हुई जीत ने लैटिन अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप प्रशासन पूर्व में दक्षिणपंथी नेता बोल्सोनारो परिवार का समर्थन कर रहा था। लूला की जीत से अमेरिका-ब्राजील संबंधों में टैरिफ, क्रिटिकल मिनरल्स और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर मतभेद बढ़ने की आशंका है, हालांकि व्यावहारिक व्यापारिक रिश्ते जारी रहने की उम्मीद है।
निष्कर्ष: क्या वीटो पावर रोक पाएगी बदलाव?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि मिड-टर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स जीत हासिल करते हैं, तो वे अपनी नीतियों की रक्षा के लिए वीटो पावर (Veto Power) का खुलकर इस्तेमाल करेंगे।
संक्षेप में कहें तो, ये मिड-टर्म चुनाव ट्रंप के कार्यकाल को सीधे तौर पर समाप्त तो नहीं करेंगे, लेकिन यदि कांग्रेस पर नियंत्रण बदला, तो ट्रंप के प्रमुख एजेंडों की राह में बड़ी कानूनी और विधायी दीवारें खड़ी होनी तय हैं।
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