मोस्स्को / बर्लिन / वाशिंगटन:
रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसा 'एंटी-नाटो प्लान' (Anti-NATO Plan) सामने रखा है, जिसने अमेरिका से लेकर पूरे यूरोपीय महाद्वीप में सनसनी फैला दी है। पुतिन केवल यूक्रेन के एक हिस्से तक सीमित शांति समझौता नहीं चाहते, बल्कि वे इस युद्ध विराम के बहाने पूरे यूरोप के सुरक्षा ढांचे को अपने पक्ष में दोबारा लिखना चाहते हैं।
क्या है पुतिन का '1997 वाला फॉर्मूला'?
'द टेलीग्राफ' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व (ट्रंप के रुख) का लाभ उठाते हुए पुतिन शांति वार्ता की मेज पर एक बड़ी शर्त रख रहे हैं। रूस चाहता है कि यूक्रेन में सीजफायर के बदले नाटो (NATO) अपने सैन्य विस्तार को समेटकर 1997 की स्थिति में वापस लौट जाए।
इसका सीधा अर्थ यह है कि 1997 के बाद से नाटो गठबंधन में शामिल हुए 15 से अधिक देशों (विशेषकर पोलैंड, फिनलैंड और बाल्टिक देशों) से नाटो को अपनी सैन्य ताकत और सैनिकों को वापस बुलाना होगा। क्रेमलिन का मानना है कि नाटो का पूर्वी विस्तार ही इस पूरे युद्ध का मूल कारण है।
ईस्टर्न फ्लैंक और यूरोप के लिए बड़ा सुरक्षा संकट
यदि अमेरिका या पश्चिमी देश रूस की इस मांग के आगे झुकते हैं, तो इसके परिणाम यूरोप के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं:
- असुरक्षित पूर्वी मोर्चा: पोलैंड और बाल्टिक देशों समेत पूरा 'ईस्टर्न फ्लैंक' (Eastern Flank) लगभग रक्षाहीन हो जाएगा, जिससे रूस के लिए भविष्य में इन देशों पर सैन्य अभियान चलाना आसान हो सकता है।
- नाटो के आर्टिकल-5 पर सवाल: नाटो की सामूहिक सुरक्षा की गारंटी (Article 5) की विश्वसनीयता पर गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।
- आर्थिक और रणनीतिक दबाव: इस चाल के जरिए रूस नाटो को कमजोर करने के साथ-साथ पश्चिमी प्रतिबंधों से राहत पाना चाहता है, ताकि अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को सुधार सके।
जर्मनी ने कसी कमर, बदल दी कमांडोज की ट्रेनिंग
रूस के इस खतरनाक मंसूबों को भांपते हुए यूरोपीय देश अब चुप बैठने के मूड में नहीं हैं। विशेष रूप से जर्मनी ने रूस के साथ संभावित सीधे टकराव की आशंका को देखते हुए अपनी सैन्य तैयारियों को युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।
- KSK कमांडोज का नया अभ्यास: जर्मनी की प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्सेज 'KSK' ने अपनी ट्रेनिंग रणनीति में भारी बदलाव किया है। अब सैनिकों को छोटे अभियानों के बजाय फील्ड में लंबे समय तक टिक कर लड़ने, अत्यधिक ठंड में मुकाबला करने और टैंक, आर्टिलरी, ड्रोन व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से निपटने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- हाइब्रिड हमलों का खतरा: यूरोप के दरवाजे पर पहले से ही रूस के गुप्त 'हाइब्रिड हमलों' का जाल बिछा हुआ है, जिससे यूरोपीय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
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नवंबर की बैठकें तय करेंगी यूरोप का भविष्य
आगामी नवंबर माह में रूस और अमेरिका के बीच तकनीकी स्तर पर होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता का अगला दौर बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। यह बैठक तय करेगी कि कूटनीति के रास्ते कोई बीच का रास्ता निकलता है या यूरोप का यह भू-राजनीतिक टकराव और अधिक गहरा होता है। एक बात तय है कि नाटो अपने पूर्वी मोर्चे को कमजोर करने की किसी भी शर्त को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, और आने वाले दिन वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद तनावपूर्ण होने वाले हैं।
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