धनबाद।प्राइवेट और सरकारी अस्पताल के बाहर एंबुलेंस लाइन लगाकर खड़ी रहती है।रोज नई एंबुलेंस इस लाइन में जुड़ती हैं,मगर किसी भी एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन नहीं होता।इसकी पुष्टि जिला परिवहन कार्यालय का रजिस्ट्रेशन आकंड़ा कहता है।पिछले पांच सालों में सिर्फ सात एंबुलेंस का ही रजिस्ट्रेशन हुआ है।जबकि कोरोना काल में और कोरोना काल के बाद बड़े पैमाने पर शहर में नई एंबुलेंस की संख्या बढ़ी है।सैकड़ों की संख्या में जिलेभर में एंबुलेंस फर्राटा भर रही हैं।
टैक्स बचाने के चक्कर में नहीं कराते रजिस्ट्रेशन
नियम के मुताबिक वाहन खरीदने के बाद इसका परिवहन कार्यालय से एंबुलेंस के नाम रजिस्ट्रेशन कराया जाता है और इसकी अलग से फीस देनी होती है।मनाकों के अनुपालन की जांच के बाद परिवहन कार्यालय एंबुलेंस के लिए एनओसी देता है।जबकि हकीकत ये है कि जिले में 90 फीसदी निजी एंबुलेंस कॉमर्शियल वाहन के नाम से रजिस्ट्रर्ड हैं।
जानें क्या है नियम
मानक कहता है कि एंबुलेंस के रूप में चलने वाली गाड़ियों में एआईएस-125 का अनुपालन अनिवार्य है। इसकी जांच परिवहन विभाग करता है। इसके अलावा एंबुलेंस को टैक्स में भी छूट दी जाती है। प्रत्येक तीन माह में टैक्स जमा करना होता है।
न जांच न कार्रवाई
जिलेभर में धड़ल्ले से वाहनों पर एंबुलेंस लिखकर मरीजों को ढोया जा रहा है,लेकिन इसके खिलाफ कार्रवाई भी नहीं होती। एंबुलेंस के मानकों का पालन न करना खतरनाक तो है ही,इससे सरकार को राजस्व का भी नुकसान है।जनवरी 2022 में डीटीओ के नेतृत्व में छापेमारी अभियान चलाकर पांच फर्जी एबुलेंस जब्त की गई थी,लेकिन इसके बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।





