इस्लामाबाद / नई दिल्ली:

पाकिस्तान में सत्ता और आतंकवाद का गहरा और पुराना नाता एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार में गृह मंत्री रहे और अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख शेख रशीद को इस्लामाबाद में खुलेआम खूंखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडरों के साथ मंच साझा करते देखा गया है। इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से खुद को भारत के 'मोस्ट वांटेड' आतंकी और 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का "गुलाम" घोषित कर दिया।

लश्कर के खूंखार कमांडरों के साथ मंच पर दिखे पूर्व गृह मंत्री

इस्लामाबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में शेख रशीद लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कमांडरों के साथ बेहद सहज नजर आए। मंच पर लश्कर के प्रमुख आतंकी शेख याकूब और संधू समेत कई अन्य संदिग्ध भी मौजूद थे।

सभा को संबोधित करते हुए शेख रशीद ने बिना किसी झिझक के कहा:

"मैं हाफिज सईद साहब का गुलाम हूँ।"

उन्होंने एक पुराना वाकया साझा करते हुए बताया कि एक बार उनके मोबाइल फोन में हाफिज सईद का संपर्क नंबर (कॉन्टैक्ट) पाया गया था, जिसके कारण उन्हें अमेरिका से निर्वासित (डिपोर्ट) कर दिया गया था।

भारत को दी गीदड़ भभकी

भारत के खिलाफ हमेशा जहर उगलने के लिए मशहूर शेख रशीद ने इस मंच का इस्तेमाल भारत को गीदड़ भभकी देने के लिए भी किया। उन्होंने उग्र भाषा का प्रयोग करते हुए कहा कि यदि भारत ने पाकिस्तान की तरफ आंख उठाकर देखा तो वहां तबाही मच जाएगी, कोई चिड़िया नहीं चहचहाएगी और न ही मंदिरों में घंटियां बजेंगी।

यह पहली बार नहीं है जब रशीद ने इस तरह के अमर्यादित बयान दिए हैं। वर्ष 2019 में भी उन्होंने भारत के खिलाफ परमाणु हमले और सीधे युद्ध की धमकियां दी थीं।

कौन है हाफिज सईद?

हाफिज सईद प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जमात-उद-दावा का संस्थापक व प्रमुख है। वह भारत में हुए कई बड़े आतंकवादी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता है:

  • 26/11 मुंबई हमला: वर्ष 2008 में हुए इस जघन्य हमले का मास्टरमाइंड, जिसमें 166 निर्दोष लोगों की जान गई थी।
  • पुलवामा हमला: जम्मू-कश्मीर में हुए पुलवामा आतंकी हमले के पीछे भी इसी का हाथ माना जाता है।
  • वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित: अमेरिका ने हाफिज सईद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर रखा है और उस पर 1 करोड़ डॉलर (लगभग 83 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया है।

सत्ता का दोहरा चेहरा हुआ उजागर

2020 से 2022 तक पाकिस्तान के गृह मंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर रहे व्यक्ति का एक खूंखार अंतरराष्ट्रीय आतंकी के प्रति इस तरह का समर्पण दिखाना यह साबित करता है कि पाकिस्तान में सरकार और आतंकी संगठनों के बीच सीमाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। इस घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के उस दावे की हवा निकल गई है जिसमें वह खुद को आतंकवाद से पीड़ित देश बताता रहा है।