संगम नगरी पर मंडराया बाढ़ का खतरा
प्रयागराज में गंगा और यमुना का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। दोनों पवित्र नदियां उफान पर हैं और इनका जलस्तर बड़ी तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। तटीय इलाकों के कई मोहल्लों में पानी घुस जाने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके हैं और उन्हें सुरक्षित स्थानों व राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ रही है।
जलमग्न हुए दर्जनों मोहल्ले
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर शहर के निचले और तटीय इलाकों में देखा जा रहा है:
- प्रभावित इलाके: नेवादा, गंगानगर, राजापुर, बेली, चिल्ला, छोटा बघाड़ा और दारागंज की दर्जनों गलियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं।
- घरों में घुसा पानी: पानी सड़कों से होता हुआ लोगों के ड्राइंग रूम और रसोइयों तक पहुंच गया है, जिससे लोग अपना कीमती सामान समेटकर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
बांधों से पानी छोड़े जाने से बिगड़े हालात
मंगलवार सुबह गंगा का जलस्तर 82.88 मीटर और यमुना का जलस्तर 82.39 मीटर दर्ज किया गया। नदियों के इस उफान के पीछे कई राज्यों में हो रही भारी बारिश और बांधों से छोड़ा गया पानी है:
- यमुना का जलस्तर: मध्य प्रदेश, राजस्थान और बुंदेलखंड में मूसलाधार बारिश का असर दिख रहा है। इसके साथ ही माताटीला और हथिनीकुंड बांधों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।
- गंगा का जलस्तर: उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही वर्षा के कारण कानपुर बैराज, हरिद्वार बैराज और नरौरा बांध से गंगा में भारी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।
- सहायक नदियां: टोंस और बेलन नदियां भी उफान पर हैं। रीवा के बाणसागर बांध से पानी छोड़े जाने के कारण टोंस नदी का स्तर भी लगातार बढ़ रहा है।
प्रशासन मुस्तैद, राहत और बचाव कार्य जारी
जिला प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व तथा जिला आपदा अधिकारी विनीता सिंह के अनुसार:
- प्रभावित लोगों के लिए दो राहत शिविर तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिए गए हैं।
- एनडीआरएफ (NDRF) और पीएसी (PAC) की बाढ़ राहत टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है।
- शहर के आठ प्रमुख स्थानों और मेजा, करछना व झूंसी के पांच स्थानों पर नावों का संचालन शुरू किया गया है ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।





