बिहार के कई जिलों में बाढ़ के प्रकोप के बीच अब एक नया स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल से बहकर आए पानी के साथ असामान्य और अज्ञात प्रजाति की मछलियां पहुंचने की सूचना मिली है। इन रहस्यमयी मछलियों का सेवन करने से कुछ स्थानीय लोगों के बीमार पड़ने की खबर के बाद राज्य प्रशासन हरकत में आ गया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (मत्स्य प्रभाग) ने आम जनता के लिए एक विस्तृत स्वास्थ्य और सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है।
दूषित पानी और संक्रमण का खतरा
मत्स्य प्रभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, बाढ़ के प्रचंड वेग के कारण तालाबों, नदियों और जलाशयों से मछलियां बहकर दूर-दूर तक फैल जाती हैं। इस दौरान ये मछलियां गंदी नालियों, सड़ रहे जैविक कचरे और मृत जानवरों के लगातार संपर्क में आती हैं।
- बैक्टीरिया और वायरस का जमाव: लगातार दूषित वातावरण में रहने से मछलियों के शरीर में हानिकारक जीवाणु (Bacteria), विषाणु (Viruses) और कवक (Fungi) पनप जाते हैं।
- स्वास्थ्य के लिए घातक: ऐसी संक्रमित मछलियों का सेवन करने से शरीर में गंभीर विषैले तत्व प्रवेश कर जाते हैं, जो इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
कब और कैसी मछली खाएं? सरकार के मुख्य निर्देश
- सेवन से बचें: जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह उतर न जाए और प्राकृतिक रूप से वातावरण स्वच्छ न हो जाए, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों के सेवन से पूरी तरह परहेज करें।
- बिक्री पर रोक: विभाग ने बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को बाजारों में बेचने पर सख्त मनाही की है।
- पहचान जरूरी: किसी भी अनजानी या असामान्य दिखने वाली मछली को बिना विभागीय पुष्टि के न खरीदें और न ही पकाएं।
बीमार पड़ने पर तुरंत करें ये काम
यदि किसी व्यक्ति ने जाने-अनजाने ऐसी मछली का सेवन कर लिया है और उसे उल्टी, दस्त, पेट में तेज दर्द, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना देर किए नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल से संपर्क करें।
मत्स्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। यदि क्षेत्र में कोई असामान्य मछली दिखाई देती है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय जिला मत्स्य पदाधिकारी या प्रशासनिक अधिकारियों को दें।





