प्रतिनिधि,रांची। मुस्लिम मजलिस उलेमा झारखंड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्लाह अज़हर कासमी ने अपने संदेश में कहा कि भारत में हजारों मस्जिदें शानदार निर्माण का नमूना हैं और इनमें हजारों नमाजियों के इबादत के लिए विशाल जगह है।देश में मुसलमानों का शैक्षणिक और सामाजिक पिछड़ापन है। इसलिए मस्जिदों के प्रभारी इमामों और उपदेशकों(खतीब) की बड़ी जिम्मेदारी है कि वे समाज के गरीब वर्ग, छात्र छात्राओं के भविष्य को सफल और उज्ज्वल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं,ताकि सुबह और शाम को मस्जिदें गुलजार(भरी) रहें। मस्जिद सिर्फ इबादत के लिए उपयोग किया जा रहा है। जबकि लाखों रुपए खर्च कर मुस्लिम समाज के लोगों के द्वारा बनाया जाता है। आज जरूरत है जिस तरह पैगंबर मोहम्मद के युग में मस्जिद का उपयोग कई मसाइल हल किया जाता था।मुसलमानों की समस्याओं का केंद्र मस्जिद होता था। जहां एक तरफ नमाज़, उपदेश, शिक्षा, प्रशिक्षण और महत्वपूर्ण समस्याओं के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया गया था। हर समस्या का समाधान पैगंबर मोहम्मद मस्जिद के अंदर बैठ कर किया करते थे। ऐसे में जिम्मेदार मस्जिदों को जागरूकता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। ताकि नई पीढ़ी को मौजूदा जरूरतों के मुताबिक सजाकर देश और कौम की तरक्की के लिए अवसर मुहैया कराए जा सकें। मुस्लिम मजलिस उलेमा झारखंड देश के सभी मुसलमानों को संदेश है कि वे इस संदेश को अपने दिल की आवाज समझें और नई पीढ़ी की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस पर अमल करने का हर संभव प्रयास करें।
गया वक्त फिर हाथ आता नहीं
सदा दौरे दौरा दिखाता नहीं।





