लखनऊ।देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के चुनावी दंगल में हर बार की तरह इस बार भी दबंग और बाहुबली नेताओं की कोई कमी नहीं है।ये नेता अपने-अपने क्षेत्रों में दंबग‌ई और बाहुबल पर चुनावों में खलल भी डालते रहे हैं,लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा भी नाम है जो प्रजातंत्र के राजा है।यूपी के बड़के जिले प्रतापगढ़ के कुंडा निर्दलीय विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया का नाम।राजा भ‌इया यूपी के बड़के जिले की भदरी रियासत के राजा हैं और पिता उदय प्रताप सिंह भदरी के महाराज हैं।राजनीति में कदम रखने वाले राजा भइया अपने परिवार के पहले सदस्य हैं। 24 वर्ष की उम्र में राजनीति की शुरुआत की थी

प्रजातंत्र के राजा लोकतंत्र में राजशाही अंदाज में प्रत‍िन‍िध‍ित्‍व करने वाले राजा भइया आज यूपी की राजनीत‍ि का मुख्य चेहरा बन गए है।राजा भइया के राजनीति का सफर इतना आसान नहीं रहा है।इनके प‍िता उदय प्रताप सिंह नहीं चाहते थे क‍ि राजनीत‍ि में कदम रखे,लेक‍िन राजा भइया की तकदीर में कुछ और ही लिखा था।राजा भइया ने जब अपने पि‍ता से चुनाव लड़ने के अनुमति मांगी तो प‍िता ने गुरुजी से अनुमत‍ि लेने के लिए कहा,और फिर शुरू हुआ तूफान सिंह राजा भइया का अजेय राजनीत‍िक सफर।

आपको बता दें कि कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भइया का जन्म 31 अक्टूबर 1969 को प्रतापगढ़ की भदरी रियासत में हुआ था।पिता का नाम उदय प्रताप सिंह और माता का नाम मंजुल राजे हैं।मां भी एक राजसी परिवार से आती हैं। राजा भइया एक और नाम से जाने जाते हैं और वो नाम तूफान सिंह है। राजा भ‌इया 1993 के विधानसभा चुनाव से राजनीति में कदम रखा था और तब से अजेय रथ पर सवार हैं।राजा भइया ने 30 नवंबर 2018 को जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी बनायी।चुनाव आयोग ने पार्टी को चुनाव चिन्ह आरी आवंटित किया है। राजा भइया को पहले भी विधानसभा चुनाव में चुनाव चिन्ह आरी निशान मिलता रहा है।

प्रजातंत्र के राजा,राजा भइया कुंडा व‍िधानसभा से अजेय रथ पर सवार हैं। 1993 में कुंडा व‍िधानसभा से पहला चुनाव लड़े थे और तब से लेकर 2017 तक हुए 6 चुनावों में बंपर वोटों से राजा भइया के जीत का परचम लहरा है। राजा भइया ने 1993 के विधानसभा चुनाव में 67287 वोटों के अंतर से समाजवादी पार्टी के ताहिर हसन को हराया। 1996 के विधानसभा चुनाव में 80141 वोटों के अंतर से भारतीय जनता पार्टी के शिवनारायण मिश्र को हराया। 2002 के विधानसभा चुनाव में 81670 वोटों के अंतर से समाजवादी पार्टी के मो शमी को हराया। 2007 के विधानसभा चुनाव में 53128 वोटों के अंतर से बहुजन समाज पार्टी के शिव प्रकाश सेनानी को हराया। 2012 के विधानसभा चुनाव में फिर बहुजन समाज पार्टी के शिव प्रकाश सेनानी को हराया और इस बार जीत का अंतर 88255 वोटों का रहा। राजा भइया ने 2017 के विधानसभा चुनाव में सबसे अध‍िक 103646 वोटों के अंतर से भारतीय जनता पार्टी के जानकी शरण को हराया।

राजा भइया भले ही उत्तर प्रदेश व‍िधानसभा तक का सफर न‍िर्दलीय विधायक बनकर करते आ रहे हों,मगर सरकार में मंत्री बनते रहे हैं।राजा भइया पहली बार कल्याण सिंह सरकार में मंत्री रहे,मुलायम सिंह यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री बने,राजनाथ सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री बने।

मुलायम सिंह यादव ने राजा भइया का विरोध किया था। उन पर दंगों में शामिल होने के आरोप थे।मायावती की सरकार सत्ता में आई तो राजा भइया पर पोटा लगाकर जेल भेज दिया गया।मायावती सरकार ने 2003 में भदरी में उनके पिता के महल और राजा भइया की बेंती कोठी पर भी छापेमारी करवाई थी।राजा भइया जब जेल से छूटे, तब वहां अखिलेश यादव, राज ठाकरे, वरुण गांधी और योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे थे। 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो राजा भइया को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया,लेकिन उसी दौरान कुंडा में चर्चित सीओ हत्याकांड हुआ। 3 मार्च 2013 को तत्कालीन कुंडा सीओ जियाउल हक की हत्या हो गई। इस हत्याकांड में राजा भइया का नाम आया और अखिलेश यादव मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा।सीओ हत्याकांड मामले में सीबीआई जांच में राजा भइया को क्लिनचिट मिली।

राजा भइया ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके पिता उनकी एजुकेशन के खिलाफ थे।राजा भइया के पिता को लगता था कि राजा भइया पढ़ाई कर लेंगे तो बुजदिल बन जाएंगे,लेकिन मां ने पिता की मर्जी के खिलाफ चोरी से राजा भइया का दाखिला प्रयागराज में करवा दिया।राजा भइया ने प्रयागराज के महाप्रभु बाल विद्यालय से अपनी प्रारंभ‍ि‍क श‍िक्षा ली।राजा भइया इसके बाद कर्नलगंज इंटर कालेज प्रयागराज में दाख‍िला ल‍िया।इसके बाद राजा भइया लखनऊ पहुंचे। राजा भइया ने लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया। बीए करने के बाद उन्होंने लखनऊ विश्व से ही वकालत की भी पढ़ाई की।