पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,बड़कागांव। हजरत इमाम हसन हुसैन की सच्चाई के प्रति बलिदान की याद में मुहर्रम पर्व बड़कागांव प्रखंड में शांति एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया। अखाड़ों में युवाओं ने एक से बढ़कर एक खेल दिखाकर अपनी कला कौशल का प्रदर्शन किया। मुहर्रम के जुलूस को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।मुहर्रम पर्व शांति एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में अकीदत के साथ मनाया गया। हर अखाड़े के साथ सैकड़ों लोग उत्साह बढ़ाने को चल रहे थे। अखाड़ों में इस बार शासन की गाइडलाइंस के अनुसार मुस्लिम समुदाय के युवाओं और बुजुर्गों ने लाठी, डंडों और पारंपरिक हत्यारों से एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज करतब दिखाया। प्रखंड के ग्राम बादम, बड़कागांव, सिरमा, महुगाई, बलिया, महुदि, चट्टी, डाडी, सिंदूवरी, चेपा कला, बेला, चंदौल, सहित अन्य गांव में ताजिया के साथ जुलूस निकली गई।





चाक-चौबंध में जगह-जगह पुलिस बल मौजूद रहा





जुलूस को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए जगह-जगह पुलिस बल मौजूद रहा। इंस्पेक्टर अनिल सिंह, थाना प्रभारी विनोद तिर्की के नेतृत्व में एसआई रितेश कुमार राव, अभय कुमार, चनेश्वर किस्कू, प्रदीप कुमार महतो, जीवन आइंद, रामाशीष यादव, एएसआई हादी खान, शिवानंद प्रसाद, संजय कुमार, बसंत भगत, राम निवास सिंह सहित सशस्त्र बल के जवान अखाड़ों का भ्रमण करते रहे। पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच सभी अखाड़े तय रूट से होते हुए गंतव्य तक पहुंचे। बड़कागांव को छोड़ कर पूरे प्रखंड में देर शाम मोहर्रम का जुलूस शांतिपूर्ण संपन्न हो गया।





आइये जानते हैं क्यों मनाया जाता है मुहर्रम





मुस्लिमों के अंतिम नबी पैगंबर हजरत मोहम्‍मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रम मनाते हैं। मुहर्रम के महीने की 10वीं तारीख को कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इस्‍लाम और न्याय की रक्षा के लिए उन्‍होंने खुद को कुर्बान कर दिया था। इस जंग में उनके साथ उनके 72 साथी भी शहीद हुए थे, लेकिन बातिल के आगे अपना सिर नहीं झुकाया। कर्बला के प्यासे शहीदों की याद में मुहर्रम का पर्व मनाया जाता है।