रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में सजायाफ्ता नक्सली कृष्ण मोहन झा उर्फ अभय जी उर्फ विकास जी उर्फ धनंजय उर्फ काली झा की मौत हो गई। कृष्ण झा सिरोसिस ऑफ लीवर की बीमारी से पीड़ित था। तबीयत खराब होने के बाद उसे जेल अस्पताल में भरती कराया गया था। वहां गुरुवार को उसकी मौत हो गई थी। कारा प्रशासन की ओर से शुक्रवार को प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पत्नी और भाई को सौंप दिया गया। शव को परिवार वाले अंत्येष्टि के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर ले गए। वह मुजफ्फरपुर के कुढ़नी थाना क्षेत्र के बथना परिया का रहने वाला था। उसका हजारीबाग जिले के चौपारण थाना क्षेत्र स्थित असवाल चौक और लातेहार के अंबा कोठी में भी आवास था। बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के जेलर यासीन खान ने बताया कि शव भेजने में जेल प्रशासन की ओर से सहयोग किया गया।

जानकारी के मुताबिक बीएचयू से स्नातक कृष्ण मोहन झा को पढ़ाई के दौरान एमसीसी के किसी नेता के साथ रहने का मौका मिला़ था। कृष्ण मोहन झा बाद में समाजिक जीवन छोड़कर हार्डकोर नक्सली बन गया। उसे कोयल शंख जोन का एरिया कमांडर बनाया गया था। 2016 में पंडरा ओपी क्षेत्र के पंडरा से मार्बल कारोबारी राजू मंडल का अगवा कर हत्या करने के मामले में पकड़ा गया था और उसे उम्र कैद की सजा हुई थी। इसी दौरान उसकी तबीयत गुमला कारागार में खराब हो गई थी, तब उसे रांची केंद्रीय कारागर में स्थानांतरित किया गया था और एम्स के डॉक्टरों के परामर्श के अनुसार इलाज चल रहा था। कृष्ण मोहन झा के विरूद्ध गुमला और लातेहार में कई नक्सली और आपराधिक मामले दर्ज थे। इन मामलों में वह अभी विचाराधीन था।

आपको बता दें कि सजायाफ्ता कृष्ण मोहन झा पिछले साल 19 सितम्बर को भोर में तीन बजे रिम्स से फरार हो गया था। उसका डॉ सीबी शर्मा वार्ड में लीवर संक्रमण का इलाज चल रहा था। अस्पताल में उसकी मां सेवा करती थी। भागने से एक दिन पूर्व शनिवार की शाम भाई मुलाकात के लिए रिम्स पहुंचा था। उसने शाम में भाई की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को मिठाई खिलाई थी। अस्पताल में उसे हथकड़ी नहीं लगाई गई थी। इसके कारण मौका पाकर रविवार को भोर में भाग गया था। उसे बाद में मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार कर रांची लाया गया था। इस मामले में बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।