रांची।झारखंड में सुरक्षाबलों के जबरदस्त संयुक्त अभियान के बाद नक्सली सरसों के दाने की बिखर गए हैं।सुरक्षाबलों ने बूढ़ापहाड़ को 11 सितंबर को नक्सलियों से मुक्त करा लिया था।बूढ़ापहाड़ नक्सलियों से मुक्त होने के बाद वहां कैंप कर रहे सौरभ जी उर्फ मारकुश बाबा, सरजीत यादव, नवीन यादव के दस्ते ने अपना ठिकाना लातेहार जिले के गारू और उसके आसपास के पठारी इलाके को बना लिया है।





पुलिस को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक बूढ़ापहाड़ से भागने के बाद मारकुश बाबा उर्फ सौरभ अपने साथी रवींद्र यादव के दस्ते के साथ सक्रिय है।वहीं नवीन और सरजीत यादव अपने एक दर्जन साथियों के साथ गारू के इलाके के गांव में सक्रिय हैं।पुलिस इन चिन्हित नक्सलियों के खिलाफ टारगेट बेस्ड अभियान चलाने की तैयारी में है।





दबिश के बाद नक्सलियों ने कुचाई इलाके को छोड़ा था





इस ऑपरेशन के बाद नक्सलियों ने ट्राइजंक्शन के कुचाई इलाके को छोड़ दिया था।एक करोड़ का इनामी पतिराम मांझी उर्फ अनल के दस्ते के दो नक्सली के मारे जाने के बाद नक्सलियों को बड़ा झटका लगा था।वहीं इस इलाके में रेंगरा कैंप स्थापित होने के बाद भी नक्सलियों की गतिविधियां कम हुई हैं।ऐसे में नक्सलियों ने रेंगरा से दूर के गांव और पौड़ाहाट में अपनी सक्रियता बढ़ायी है, जिसे लेकर बड़ा अभियान शुरू होना है।





लगातार एंटी नक्सल ऑपरेशन ने तोड़ी कमर





आपको बता दें कि राज्य में लगातार सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन से नक्सलियों की कमर टूटी है।नक्सलियों से बूढापहाड़ मुक्त होने के बाद झारखंड,बिहार और छतीसगढ़ में भाकपा माओवादी संगठन को तगड़ा झटका लगा है। बूढ़ापहाड़ नक्सलियों का गढ़ था।वहीं झारखंड के पारसनाथ, झुमरा और कोल्हाल के ट्राइजंक्शन पर भी दर्जनों कैंप स्थापित हुए हैं।जिसका असर नक्सलियों के संगठनों पर पड़ा है।वर्तमान में राज्य का माओवादी नेतृत्व संकट से गुजर रहा हैं।





कोल्हान में भी ट्राइजंक्शन से खदेड़े गए माओवादी





चाईबासा, खूंटी और सरायकेला के कुचाई में भाकपा माओवादियों ने बीते तीन सालों से अपना बसेरा बना रखा था। सुरक्षाबलों ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में ट्राइजंक्शन पर ऑपरेशन थंडरबोल्ट चलाया था। इस ऑपरेशन के दौरान एक महिला और एक पुलिस सेक्शन कमांडर मारा गया था। दोनों के पास से एके-47 हथियार भी बरामद किया गया था।