भाजपा ने सारी हुई सीटों पर चला ये दांव तो,कई सीटों पर पलट गई बाजी
भाजपा ने हारी हुई सीटों पर चला ये दांव तो, कई सीटों पर पलट गई बाजी <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के पीछे उसके रणनीतिक कौशल का भी खास योगदान है।भाजपा ने रणनीतिक सूझबूझ ने हारी हुई सीटों पर भी जीत का परचम लहराया है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पिछली 2017 में हारी हुई सीटों पर जीत का परचम लहराने की योजना बनाई थी।भाजपा ने 85 में से 23 सीटों पर जीत का परचम लहराने में सफल हुई है और इनमें से अधिकतर सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा गया था।इन सीटों से कुछ सीटें ऐसी भी थीं, जिन पर कई दशकों से दूसरी पार्टियों ने कब्जा जमाया था। 2017 में मोदी नाम की सुनामी के बाद भी जिन सीटों पर भाजपा हारी,वहां उम्मीदवार बदले गए।बदलाव की बात लोगों तक पहुंचाई गई और भाजपा इसमें सफल रही है।
रामगोविंद चौधरी की सीट भी खिला कमल
इस बार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कुछ ऐसी सीटों पर दांव लगाया था जिस पर जीत परचम लहराना उसके लिए मुश्किल था।इनमें मैनपुरी, सिधौली, चिल्लूपर, बांसडीह, रायबरेली सदर, कन्नौज सदर जैसी सीटें शामिल थीं।बांसडीह में विधायक दल के समाजवादी पार्टी नेता राम गोविंद चौधरी चुनाव लड़ रहे थे। यहां भारतीय जनता पार्टी ने निषाद पार्टी के केतकी सिंह को चुनावी मैदान में उतारा था।केतकी ने राम गोविंद चौधरी को पराजित कर ये सीट भारतीय जनता पार्टी की झोली में डाल दिया है।बांसडीह सीट पर सपा के वरिष्ठ नेता रामगोविंद चौधरी लगातार छह बार से जीत का परचम लहरा रहे थे।इस बार भी माना जा रहा था कि राम गोविंद फिर जीत का परचम लहरा कर सदन में पहुंचेंगे, लेकिन चुनाव हार गए।राजभर के साथ गठबंधन भी राम गोविंद चौधरी की मदद नहीं कर पाया।बैरहाल ऐसा कहा जा रहा है कि सपा मुखिया अखिलेश राम गोविंद चौधरी को एमएलसी बनाएंगे और सदन में लेकर आएंगे ताकि उन्हें विधान परिषद का नेता बनाया जा सके।
खत्म हुई गोरखपुर में चिल्लूपार से हाते की हनक
गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वांचल के बाहुबली हरिशंकर तिवारी की पारंपरिक चिल्लूपर सीट पर जीत का परचम लहरा कर कब्जा कर लिया। हरिशंकर के बेटे विनय शंकर पिछली बार बहुजन समाज पार्टी से विधायक थे और इस बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में थे।विनय शंकर त्रिपाठी को भारतीय जनता पार्टी के राजेश त्रिपाठी ने पराजित था। सूबे की राजधानी लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर भारतीय जनता ने पहली बार जीत का परचम लहराया है,तो वहीं 40 साल बाद सीतापुर जिले की सिधौली सीट पर भी जीत का परचम लहराया है।
दूसरे दलों के सहारे भी पुराने गढ़ों पर किया कब्जा
भारतीय जनता पार्टी ने अन्य पार्टियों के विधायकों को ये खोई हुई सीटें जीतने का मौका दिया और कई सीटों पर अपने और सहयोगियों के नए चेहरों को भी उतारा। सोनिया गांधी के गढ़ रायबरेली की सदर सीट जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को अपनी पार्टी में लिया।सिधौली जीतने के लिए सपा से मनीष रावत और हरदोई सदर सीट जीतने के लिए सपा से नितिन अग्रवाल को अपनी पार्टी में लिया और हरदोई सदर सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो गया।
104 सीटों पर आए नये चहरे, 80 जीते
भारतीय जनता पार्टी ने 85 में से कुल 69 सीटों पर नए चेहरे उतारे थे। इनमें से पार्टी ने 19 पर कब्जा किया था। शेष 16 सीटों पर 2017 का चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इनमें से 4 पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। भारतीय जनता पार्टी ने पहले बड़े पैमाने पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटने की योजना बनाई थी, लेकिन सिर्फ 104 विधायकों के टिकट काटे गए। इन 104 सीटों पर नए चेहरों को मैदान में उतारा गया और इनमें से भारतीय जनता पार्टी ने फिर से 80 पर जीत हासिल की। वहीं, 214 मौजूदा विधायक मैदान में थे और 170 फिर से जीतने में सफल रहे।
हारी हुई सीटों पर जीत के साथ पार्टी गदगद
भारतीय जनता पार्टी इस जीत से गदगद नजर आ रही है। पार्टी के महासचिव और चुनाव प्रबंधन प्रभारी जेपीएस राठौर का कहना है कि इस बार हमने पिछली बार हारे या दशकों से हारे सीटों को जीतने की योजना तैयार की थी। पिछली बार हारी हुई 85 सीटों में से वह इस बार 23 पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। इस बार हम कुल 68 फीसदी सीटें जीतने में सफल रहे और पिछली बार जीती गई 78 फीसदी सीटों पर फिर से कमल खिल गया।
संबंधित ख़बरें

हरियाणा: 582 विलेज नॉलेज सेंटर, राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक समेत नायब सरकार के कई ऐतिहासिक फैसले

बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर जोशीमठ के पास क्रैश, पायलट समेत सभी 6 लोगों की मौत
● ब्रेकिंग

प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का आंदोलन उग्र, कफन ओढ़कर किया चक्काजाम
● ब्रेकिंग

