प्रतिनिधि,हज़ारीबाग़। टाटीझरिया पंचायत सेवक पर 10 हजार रुपए मांगने का भुक्तभोगी ने आरोप लगाया।भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि अधिकारी मृत्यु प्रमाण पत्र ,आवास निर्माण,वृद्धावस्था पेंशन समेत अन्य गरीबों को दी जाने वाली योजनाओं के नाम पर भी पैसे लेने में जरा भी नहीं हिचकिचाते। यदि कोई चढ़ावा नहीं चढ़ाया तो फिर उसे प्रखंड कार्यालय आते -जाते चप्पल अवश्य घिस जायेंगे। ऐसी ही घटना टाटीझरिया में घटित हुई है।
अटका बगोदर(गिरिडीह) निवासी हरिनाथ तिवारी सोमवार से धरने में बैठे हुए हैं।मंगलवार से इन्होंने आमरण अनशन की घोषणा भी कर दिया है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा संजीत तिवारी की हत्या टाटीझरिया थाना क्षेत्र के बेदम जंगल में कर दिया गया था,जहां से उसका कंकाल बरामद हुआ था। हत्यारे को भी टाटीझरिया थाना पुलिस ने पकड़ा।उसके ही निशानदेही पर उनके बेटे की लाश बरामद हुई थी। 28 सितंबर 2022 को उसकी लाश(कंकाल) बरामद हुई थी। उसके हाथ में कड़ा और उसके कपड़े के आधार पर उसकी पहचान हुई थी। उन्होंने अपने बेटे का अंतिम संस्कार किया और तब से उसके मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लगातार दौड़ रहा है। बताया कि पंचायत सेवक अर्जुन प्रसाद ने उस समय मुझसे 10 हजार रुपए मांगा था। उसने कहा था कि बीडीओ मैम, मेरा और अन्य लोगों का इसमें बनता है।जब रुपए नहीं दिया तो इन्होंने मृत्यु प्रमाण पत्र न देने का कई बहाना बनाना शुरू कर दिया। इन्होंने कहा कि इसी क्रम में तिवारी की पत्नी की भी मौत खौफ की वजह से हो गई।इसका जवाबदेह बीडीओ,पंचायत सेवक हैं।
इन्होंने कहा कि जब बेटा चला गया,पत्नी चली गई फिर भी मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिला,तो मैं भी यहीं प्रखंड कार्यालय के सामने अपनी जान दे दूंगा,ताकि इन्हे मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र देने में कोई पहचान की जरूरत न पड़े। वे बोलते -बोलते काफी भावुक हो गए।
क्या कहती हैं बीडीओ
बीडीओ शाइनी तिग्गा ने साफ कहा कि जब तक उसके मृत्यु का डेट निश्चित नहीं हो जाता,जब तक डीएनए रिपोर्ट नहीं आ जाता।इसे मृत्यु प्रमाण पत्र हम निर्गत नहीं कर सकते।
मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए बीडीओ और थाना प्रभारी आमने -सामने
हज़ारीबाग़। टाटीझरिया बीडीओ कहती है कि थाना प्रभारी एक निश्चित तिथि मेंशन करके हमें दें तो हम सोचेंगे। कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी लिखा हुआ है कि दो से तीन हफ्ते के पूर्व इसकी मृत्यु हुई हो सकता है। लाभुक द्वारा इसके मृत्यु का निश्चित तिथि नहीं दिया गया है। थानेदार लिख दें। इस पर थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार ने भी कहा कि वे मृत्यु की तारीख कैसे लिख दें,उन्होंने जब शव बरामद किया,वही तारीख लिखे हैं। सांख्यिकी पदाधिकारी अनिल राणा ने तो मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रपत्र भी थानेदार को भरने के लिए कह दिया।
कभी प्रखंड तो कभी थाना परिसर में अधिकारियों,जनप्रतिनिधियों की इसी सिलसिले में भिड़ लगी रही। बीडीओ मैम डीसी से तो थानेदार एसपी से संपर्क करते देखे गए।बीच में मृत पिता हरिनाथ तिवारी का स्वास्थ्य भी इस बेतहाशा गर्मी में खराब हो रहा है।





