लखनऊ।उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चुनावी रण के परिणाम पर अब सभी की नजरे टिकी हैं।यूपी में सातवें और अंतिम चरण का चुनावी रण (मतदान) संपन्न हो गया है। 10 मार्च को चुनावी रण के जीत और हार परिणाम घोषित होगा।इस बार कोरोना की वजह से शुरुआती दौर में चुनावी रण का प्रचार कछुए के चाल की तरह सुस्त रहा है,लेकिन तीन चुनावी रण के बाद राजनीतिक पार्टियों ने ऐड़ी से लेकर चोटी तक पूरी ताकत झोंक दी।सभी पार्टियों ने बाकी बचे चुनावी रण में महिला नेताओं को उतार दिया।महिला नेताओं ने भी आधी आबादी को पूरा करने के लिए चुनावी रण में खूब वादे किए हैं।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा हों या बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती या भारतीय जनता पार्टी की स्टार प्रचारक स्मृति ईरानी। सभी ने चुनाव प्रचार में अपनी छाप छोड़ी।

आक्रामक नजर आईं प्रियंका

राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को चुनावी रण में प्रचार से खाली समय मिल गया। इस बार चुनावी रण में महिला नेताओं ने रोड शो किया और जनसंपर्क किया और इनकी रैलियों में भी काफी भीड़ भी हुई।कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में चुनाव प्रचार के मामले में काफी आक्रामक नजर आईं। प्रियंका कांग्रेस की स्टार प्रचारक थीं और उत्तर प्रदेश में पूरा चुनाव प्रचार उनके कंधों पर था।इस बार विधानसभा चुनाव के रण की पूरी कमान प्रियंका के हाथों में रही।प्रियंका ने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी (पश्चिम से लेकर पूरब) तक इस बार रोड शो और रैलियां की। बुंदेलखंड में भी प्रचार के लिए पहुंचीं थीं।

हर बार के मुकाबले कम निकलीं मायावती

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने चुनावी रण में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभाली और यूपी में 20 चुनावी सभाएं की।कांग्रेस ने मायावती पर चुनाव में निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया,लेकिन मायावती ने भी कांग्रेस को ऐसा ही जवाब दिया। मायावती ने बाद के तीनों चरणों के चुनावी रण में अपनी गति को तेज किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र के संसदीय क्षेत्र तक प्रचार करती हुई नजर आईं।इस दौरान मायावती ने विरोधियों के हर सवालों का मजबूती के साथ जवाब दिया। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि मायावती इस बार कम सक्रिय दिखाई दीं।

ईरानी ने किया जोरदार प्रचार

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के चुनावी रण में प्रचार के लिए अमेठी से पार्टी सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को भी चुनावी रण में उतारा था।ईरानी ने अमेठी और रायबरेली के अलावा (कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी) पश्चिम से लेकर पूरब तक अपनी रैलियां की और विपक्ष पर जोरदार हमला बोला।ईरानी ने यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड में भी प्रचार किया।ईरानी यूपी की कई सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए उतरीं और राजनीतिक विरोधियों पर लगातार हमला बोलती रहीं।

डिंपल ने अंतिम तीन चरणों के चुनावी रण में झोंकी ताकत

समाजवादी पार्टी की स्टार प्रचारक व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव हालांकि चुनाव के शुरूआती चरण के चुनावी रण में प्रचार करती हुई नजर नहीं आईं।डिंपल आधे चुनावी रण के बाद अचानक ही सक्रिय हुई, क्योंकि पूर्वांचल में उनकी रैलियों की डिमांड ज्यादा थी।बाद के चुनावी रण में समाजवादी पार्टी ने डिंपल यादव को चुनाव में स्टार प्रचारक बनाया और डिंपल अपने ही बयान को लेकर विवादों में घिर गईं। डिंपल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बयान दिया था अयोध्या के साथ-साथ काशी में भी संतों ने विरोध किया और डिंपल यादव को सलाह दी। समाजवादी पार्टी ने पूर्व सांसद डिंपल यादव के साथ राज्यसभा सांसद जया बच्चन को भी चुनावी रण में उतारा।

मुलायम की बहू अपर्णा ने अपनों पर ही साधा निशाना

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव और इनके परिवार के लिए इस बार का चुनावी रण बेहद कठिन था। चुनाव से ठीक पहले अपर्णा यादव भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली।अपर्णा ने राजधानी लखनऊ की सरोजनीनगर विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी पेश की थी लेकिन टिकट नहीं मिला। भारतीय जनता पार्टी ने अपर्णा यादव का प्रयोग पूर्वांचल में रैलियां कराकर किया। भारतीय जनता पार्टी की कोशिश अपर्णा को मुलायम परिवार के खिलाफ इस्तेमाल करने और यादव समाज में एक बड़े नेता के तौर पर तैयार करने की है।