लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव करीब हैं। भाजपा के लिए अब ऐसे में कई बड़े नेताओं का इस्तीफा बड़ा सिर का दर्द बन गया है।अभी तक भाजपा से 14 बड़े नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं।बड़ी बात ये है कि नेताओं का इस्तीफा देने का सिलसिला थमता हुआ नहीं दिख रहा है।विपक्ष इस बात का संकेत भी दे चुका है कि भाजपा के कई और नेता अभी पार्टी छोड़ेंगे।

आइए जानें अभी तक किन-किन नेताओं ने पार्टी छोड़ी

स्वामी प्रसाद मौर्य भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर यूपी के कुशीनगर जिले के पडरौना विधानसभा से विधायक चुने गए और योगी मंत्रिमंडल में श्रम मंत्री रहे। स्वामी ने चुनाव से पहले भाजपा से इस्तीफा दे दिया और सपा में शामिल होने का ऐलान किया है। स्वामी योगी सरकार में अपने बेटे उत्कर्ष मौर्य को उचित पद न मिलने से परेशान थे।

कानपुर जिले की बिल्हौर विधानसभा सीट से 2017 में चुनाव जीतने वाले भगवती प्रसाद सागर ने भाजपा से इस्तीफा दिया है। भगवती ने बसपा से राजनीति की शुरूआत की थी और 2007 में चुनाव जीतकर राज्यमंत्री बने थे। 2017 में स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भगवती भाजपा में शामिल हुए थे।

शाहजहांपुर जिले की तिलहर विधानसभा से विधायक रोशनलाल शर्मा ने भी भाजपा का साथ छोड़ दिया। रोशनलाल ने कहा कि 5 सालों में उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई इसलिए उन्होंने ये फैसला लिया।

बांदा जिले की तिंदवारी विधानसभा सीट से विधायक ब्रजेश प्रजापति ने भी भाजपा का साथ छोड़ दिया। माना जा रहा है कि ब्रजेश स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में यह कदम उठाया है।

औरैया जिले की बिधूना विधायक विनय शाक्य ने भाजपा से इस्तीफे की घोषणा कर भाजपा को तगड़ा झटका दिया है। विनय इस्तीफा देने के तुरंत बाद स्वामी से मिलने उनके लखनऊ स्थित आवास पर पहुंचे।

पश्चिम उत्तर प्रदेश में गुर्जर समुदाय में मजबूत पकड़ रखने वाले अवतार सिंह भड़ाना बुधवार को भाजपा छोड़ आरएलडी में शामिल हो गए। चार बार के सांसद भड़ाना ने 2017 में भाजपा के टिकट पर मीरापुर विधानसभा से जीत हासिल की थी।

पूर्वांचल के मऊ जिले की मधुबन विधानसभा के विधायक दारा सिंह चौहान ने भाजपा से बाय बाय कर लिया।दारा ने योगी सरकार पर दलितों और पिछड़ों की अनदेखी का आरोप लगाया।योगी सरकार में वन पर्यावरण और जन्तु उद्यान मंत्री थे।

फिरोजाबाद जिले की शिकोहाबाद विधानसभा से विधायक मुकेश वर्मा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। मुकेश ने भाजपा पर पिछड़ों और दलितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मुकेश ने कहा कि वे स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ हैं, वे जहां जाएंगे वह भी उनके साथ ही जाएंगे।

राकेश राठौर ने सबसे पहले 2007 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था,लेकिन राकेश को जीत नसीब नहीं हुई। इसके बाद पिछले विधानसभा चुनावों में राकेश भाजपा के टिकट पर सीतापुर सदर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

बहराइच जिले की नानपारा विधानसभा से भाजपा की विधायक माधुरी वर्मा सपा में शामिल हो गईं।माधुरी की छवि एक दलबदलू नेता की रही है।माधुरी ने सबसे पहले बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा,इसके बाद 2012 में कांग्रेस के टिकट पर नानपारा विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। माधुरी ने 2017 के चुनावों में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा।

जय चौबे 2012 में भाजपा के टिकट पर खलीलाबाद विधानसभा से चुनाव लड़ा और इसके बाद 2017 में फिर से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा। जय ने सपा का दामन थाम लिया।

बदायूं जिले की बिल्सी विधानसभा से विधायक आर के शर्मा ने चुनाव की घोषणा बाद भाजपा को तगड़ा झटका दिया और सपा का दामन थाम लिया। ऐसा माना जा रहा था कि भाजपा इस बार शर्मा को टिकट नहीं देगी।इसी वजह से सपा का दामन थाम लिया।

लखीमपुर खीरी जिले की धौरहरा सीट से विधायक रहे बाला अवस्थी ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। उनके सपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।बाला ने योगी सरकार पर ब्राह्मणों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है।बाला ने 2007 में बसपा के टिकट पर लखीमपुर खीरी से चुनाव लड़ा था और 2017 चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे।