यूरोप:
यूरोप के कई देशों में आसमान छूती महंगाई, महंगे ईंधन, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाल स्थिति के खिलाफ असंतोष अब हिंसक विरोध प्रदर्शनों में बदल चुका है। अल्बानिया, इटली और फ्रांस जैसे देशों में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां सरकारें व्यवस्था बहाल करने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं।
1. अल्बानिया (तिराना): आठवें दिन भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों में खूनी संघर्ष
अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं और मंगलवार को लगातार आठवें दिन भी हालात बेकाबू रहे।
- छात्रों का उग्र प्रदर्शन: इन प्रदर्शनों में हाईस्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र बड़ी संख्या में शामिल हो चुके हैं। वे ट्यूशन फीस में कटौती, शिक्षा बजट बढ़ाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। साथ ही समाजवादी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ रही है।
- पुलिस की कार्रवाई: उग्र भीड़ द्वारा पुलिस पर पत्थर, फ्लेयर्स और पेट्रोल बम फेंकने के जवाब में सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
- ट्रंप के दामाद का प्रोजेक्ट भी चर्चा में: यह आंदोलन देश के दक्षिणी तट पर एक लग्जरी पर्यटन प्रोजेक्ट के खिलाफ शुरू हुए 'फ्लेमिंगो आंदोलन' से जुड़ा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की निवेश कंपनी से संबंधित है।
- पीएम का बयान: प्रधानमंत्री एदी रामा ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा के जरिए सत्ता पलटने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
2. इटली: सख्त सुरक्षा कानून मंजूर, दंगाइयों को 5 साल की जेल
उत्तरी इटली के मिलान शहर में सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए बेहद कड़े सुरक्षा उपायों को मंजूरी दे दी है:
- सख्त सजा के प्रावधान: प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों और दंगों में शामिल होने पर 5 साल तक की जेल और अधिकतम 20,000 यूरो जुर्माने का नया कानून बनाया गया है। चेहरा छिपाने या हिंसा में किसी के घायल होने पर सजा और बढ़ जाएगी।
- अभिभावकों पर शिकंजा: यदि तोड़फोड़ या लूटपाट की किसी घटना में नाबालिग शामिल पाए जाते हैं, तो उनके माता-पिता को इसके लिए आर्थिक और कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। पुलिस अब 14 से 17 वर्ष के किशोरों को भी एहतियातन हिरासत में ले सकेगी।
- सैनिकों की तैनाती: मिलान में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के लिए 2026 के अंत तक पुलिस के साथ 500 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया जाएगा।
- ट्रक चालकों की हड़ताल से किल्लत: दूसरी ओर, नेपल्स और सिसिली जैसे दक्षिणी इलाकों में ट्रक चालकों की एक हफ्ते से जारी हड़ताल के कारण सुपरमार्केट की अलमारियां और पेट्रोल पंप खाली होने लगे हैं, जिससे रोजमर्रा के सामान की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
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3. फ्रांस: पेरिस सहित कई शहरों में कर्फ्यू बढ़ा
सप्ताहांत में देश भर में हुई भारी हिंसा और अशांति के बाद फ्रांस के कई प्रमुख शहरों में सख्ती बढ़ा दी गई है।
- पेरिस में नाइट कर्फ्यू: राजधानी पेरिस में स्थानीय प्रशासन ने लगातार दूसरी रात कर्फ्यू का दायरा बढ़ाते हुए प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स इलाकों में पाबंदियां लागू कीं।
- ऐतिहासिक अशांति: शनिवार को देश में सैकड़ों हजार लोग सड़कों पर उतरे थे, जिसके बाद फ्रांस को पिछले कई वर्षों के सबसे भीषण और हिंसक विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा है।
पूरे यूरोप में सुलगती सुलगती आर्थिक समस्याएं
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्बानिया, इटली और फ्रांस की अलग-अलग स्थानीय घटनाओं के पीछे मूल वजहें एक जैसी हैं। आम जनता लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतों, आवास की भारी कमी और चरमराती सार्वजनिक सेवाओं से त्रस्त हो चुकी है। स्पेन, पुर्तगाल और ग्रीस जैसे अन्य यूरोपीय देशों में भी इसी तरह के असंतोष और प्रदर्शनों का दौर जारी है।
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