योगी सरकार पार्ट-2 में हो सकते हैं तीन डिप्टी सीएम, ब्राह्मण, ओबीसी और दलितों को साधने की तैयारी
योगी सरकार पार्ट- 2 में हो सकते हैं तीन डिप्टी सीएम, ब्राह्मण,ओबीसी और दलितों को साधने की तैयारी <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश

लखनऊ।उत्तर प्रदेश में लंबे अरसे के बाद भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी बार सरकार बनाने जा रही है। योगी आदित्यनाथ 25 मार्च को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों के नाम निर्धारित नहीं हो पाए हैं।सूत्रों से खबर है कि योगी सरकार पार्ट-2 में जातीय समीकरणों को पूरी तरह ध्यान में रखा जाएगा ताकि 2024 की तैयारी मजबूती से हो सके।
विधानसभा चुनाव के दौरान सपा समेत सभी विपक्षी दलों ने भाजपा पर पिछड़ा विरोधी होने का आरोप लगाया था।इसके अलावा ब्राह्मणों की भी उपेक्षा करने की बात कही गई थी।भाजपा ऐसे परसेप्शन से निपटने के लिए मजबूत तैयारी के साथ जुटी है और यही कारण है कि भाजपा के आलाकमान इस बार दो की बजाय तीन उपमुख्यमंत्री देने पर विचार कर रहे है।पार्टी का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश के प्रमुख वर्गों को ये संदेश दिया जाएगा कि उन्हें नेतृत्व में हिस्सेदारी देने का काम किया गया है।
आओ जानें इन समीकरणों को साधने के लिए भाजपा की क्या है तैयारी
योगी सरकार के बीते कार्यकाल में केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री थे।सबसे दिलचस्प बात ये है कि अपने गृह जनपद कौशांबी की सिराथू विधानसभा से पराजित होने वाले केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री से बनाये जाने की संभावना है।दिनेश शर्मा की छुट्टी हो सकती है यानी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना नहीं है। दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री न बनाए जाने कारण है कि बीते कार्यकाल में बहुत सक्रिय नहीं दिखे और इसके अलावा ब्राह्मणों के बीच भी पार्टी की साख को बहुत मजबूत नहीं कर सके।अब ऐसे में दिनेश शर्मा की जगह ब्रजेश पाठक को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना है। ब्रजेश पाठक राजधानी लखनऊ की कैंट से जीत दर्ज की है।ब्रजेश पाठक बसपा में एक समय के दौर से ब्राह्मणों के बीच खासे सक्रिय हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा ने ब्राह्मणों को लुभाने के लिए ब्रजेश पाठक का जमकर इस्तेमाल किया था।
भाजपा केशव को हटाकर नहीं उठाना चाहती है रिस्क
भाजपा केशव प्रसाद मौर्य को लेकर किसी भी तरह का रिस्क नहीं उठाना चाहती है। केशव के ही प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए 2017 में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। इसके अलावा केशव उपमुख्यमंत्री के तौर पर भी काफी वोकल दिखे थे, लेकिन चुनाव हारने के बाद केशव के भविष्य को लेकर भी कयास लग रहे हैं। भाजपा का मानना है कि केशव बड़े ओबीसी नेता के तौर पर उभरे हैं और ऐसे में उन्हें हटाने का गलत संदेश जाएगा। यही वजह है कि भाजपा केशव को बनाए रखने पर ही विचार कर रही है।केशव को सिराथू सीट पर पल्लवी पटेल से पराजित होना पड़ा था।
बेबी रानी के जरिए मायावती को और दर्द देने की तैयारी
अब अगर बेबी रानी मौर्य की बात करें तो भाजपा ने चुनाव से ठीक पहले उनका उत्तराखंड के गवर्नर पद से इस्तीफा दिलवाया था और इसके बाद आगरा ग्रामीण सीट से उतारा भी गया,जहां बेबी रानी को बड़ी जीत मिली है। गवर्नर पद छोड़कर चुनावी राजनीति में बेबी रानी मौर्य के आने के बाद से ही कयास लग रहे थे कि सरकार का हिस्सा बनाया जा सकता है। दरअसल बेबी रानी जाटव बिरादरी से आती हैं, जिससे मायावती ताल्लुक रखती हैं। दलितों की अन्य बिरादरियां भाजपा को कई चुनावों से अच्छा समर्थन दे रही हैं, लेकिन मौर्य को प्रमोट कर भाजपा को मायावती को एक और गहरा दर्द देने की तैयारी में है।
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