राख की रखवाली में रेलवे ने एक साल में खर्च कर दिया 15 लाख, जानें क्या है मामला
राख की रखवाली में रेलवे ने एक साल में खर्च कर दिया 15 लाख,जानें क्या है मामला <Br/> <Br/>
sanjay kumar📍 रांची, झारखंड

धनबाद।रेलवे की करोड़ों-अरबों रुपए की संपत्ति बिना सुरक्षा जहां-तहां पड़ी है,लेकिन हिल कॉलोनी में राख की रखवाली के लिए रेलवे ने एक साल में 15 लाख रुपए उड़ा दिए।एक साल पहले हिल कॉलोनी में रेलवे के एसपी के घर की बाउंड्री के पास रखे केबल के बंडलों में आग लग गई थी।केबल जल कर राख हो गया।इन मलबों को हटा कर अन्यत्र रखने की जगह तीनों शिफ्टों में आरपीएफ के जवान इसकी पहरेदारी कर रहे हैं।
12 महीनों में सिर्फ जले हुए केबल की सुरक्षा के लिए रेलवे आरपीएफ जवानों को वेतन में 15 लाख रुपए से अधिक का भुगतान कर चुका है। पहले कुछ दिनों तक कहा जाता रहा कि केबल अग्निकांड की जांच मुख्यालय की टीम करेगी। इसलिए मलबों को नहीं हटाया जा रहा है। अब सवाल उठता है कि जांच कबतक होगी और कब तक आरपीएफ जवानों को राख की देखभाल के लिए वेतन दिया जाता रहेगा। अभी भी हिल कॉलोनी में जहां-तहां केबल ड्रम ऐसे रखा है। कोई यह बताने की स्थिति में नहीं है कि आखिर कब तक मलबा सड़क पर पड़ा रहेगा और आरपीएफ के जवान अपने मूल काम छोड़ कर इसकी रखवाली करते रहेंगे। रास्ते पर केबल का राख पड़ा रहने से कर्मियों और परिजनों को घूम कर दूसरे रास्ते से स्टेशन जाना पड़ रहा है। रेलवे पुलिस की बैरक के बगल का रास्ता आम रास्ता बना है।
धू-धू कर जल गया था करोड़ों का केबल
रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग ने नई लाइन बिछाने के लिए केबल का ड्रम मंगाया था। एक साल पहले पांच मार्च को यहां रखे केबल ड्रम धू-धू कर जल उठे थे। धुएं का गुब्बार ऐसा था कि धनबाद के किसी कोने से उसे देखा जा सकता था। 13 घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने केबल ड्रम की आग पर काबू पाया था। करीब 400 केबल ड्रम जल कर मलबों के ढेर बन गया था। आग से रेलवे को पांच करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था। यह अब परेशानी का सबब बनता जा रहा है।
केबल के तांबे की हो रही सुरक्षा
अगलगी में केबल का ऊपरी हिस्सा भले जल गए हों लेकिन अंदर का तांबा अभी बचा है। तांबा चोरी न हो जाए इसलिए आरपीएफ जवानों को तैनात किया जाता है। हालांकि रेलवे ने इस घटना के बाद भी सीख नहीं ली।
कॉलोनी के लोगों का बंद हो गया रास्ता
हिल कॉलोनी में जले केबल का मलबा बीच सड़क पर पड़ा है। कई रेल कॉलोनियों को रेलवे स्टेशन से जोड़ने का यह प्रमुख रास्ता है। रेल कॉलोनियों से रेलकर्मी रास्ते से अपनी ड्यूटी के लिए स्टेशन पहुंचते थे।
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