अंबिकापुर (छत्तीसगढ़): आमतौर पर राजघरानों से ताल्लुक रखने वाले युवाओं का रुझान राजनीति, प्रशासनिक सेवाओं या बड़े कॉरपोरेट कारोबार की ओर होता है। लेकिन सरगुजा राजपरिवार के सदस्य विंधेश्वर शरण सिंहदेव ने एक अलग राह चुनी। बीकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय यूएस सिंहदेव की कृषि विरासत को आगे बढ़ाते हुए खेती को ही अपना मुख्य पेशा बनाया। आज वे अंबिकापुर के समीप सरगवां में करीब 40 एकड़ भूमि पर 100% ऑर्गेनिक (जैविक) फार्मिंग कर देश के युवाओं के सामने मिसाल पेश कर रहे हैं।
सरगुजा के 'जीराफूल' चावल की दिल्ली तक मांग
विंधेश्वर ने अपने 40 एकड़ के खेत को एक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड फार्म (एकीकृत कृषि मॉडल) के रूप में विकसित किया है। यहाँ छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध स्थानीय सुगंधित धान 'जीराफूल' के अलावा अंजीर, हरी सब्जियाँ और विभिन्न प्रकार के फलों की खेती की जाती है।
रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग पूरी तरह बंद कर प्राकृतिक तरीकों से फसलें उगाई जाती हैं। जीराफूल चावल के स्वाद, प्राकृतिक खुशबू और उच्च गुणवत्ता के कारण अब इसकी मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े महानगरों में बनी हुई है। विंधेश्वर के अनुसार, जैविक पद्धतियों के प्रयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता सुधरी है, बल्कि पैदावार में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
शून्य-अपशिष्ट मॉडल: खेती के साथ डेयरी और बायोगैस
विंधेश्वर के कृषि मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसका 'जीरो वेस्ट' और लागत-कुशल (Cost-effective) होना है:
- डेयरी और जैविक खाद: फार्म में एक बड़ी डेयरी स्थापित की गई है, जहाँ से भारी मात्रा में दूध उत्पादन होता है।
- बायोगैस संयंत्र: डेयरी से निकलने वाले गोबर का इस्तेमाल बायोगैस बनाने और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (वर्मीकंपोस्ट) तैयार करने में किया जाता है।
- लागत में कमी: इसी होममेड जैविक खाद का उपयोग खेतों में किया जाता है, जिससे बाजार से महंगी खाद खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और खेती की कुल लागत में भारी कमी आती है।
60 से 70 स्थानीय परिवारों को रोजगार
यह फार्म केवल एक सफल बिजनेस मॉडल ही नहीं है, बल्कि स्थानीय आजीविका का बड़ा जरिया भी बन चुका है। वर्तमान में इस फार्म के माध्यम से आसपास के 60 से 70 लोगों को नियमित रोजगार मिल रहा है।
विंधेश्वर का मानना है कि यदि आज के युवा आधुनिक तकनीकों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जैविक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के साथ कृषि क्षेत्र में कदम रखें, तो खेती एक बेहद टिकाऊ और मुनाफा देने वाला व्यवसाय (Profitable Business) बन सकती है। उनका यह 40 एकड़ का मॉडल पारंपरिक खेती, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण के संतुलित मेल का बेहतरीन उदाहरण है।





