रांची।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विधानसभा सदस्यता से जुड़े मामले को लेकर झारखंड में सियासी संकट के बादल के छाए हैं।बढ़ी सियासी तपिश थमने का नाम नहीं ले रही है।सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे पर रोज शब्दों के बाण दनादन चला रहे हैं। बुधवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमला बोलते हुए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। सियासी दांवपेच के बीच बुधवार शाम को संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम सहित कांग्रेस के चारों मंत्री रायपुर से रांची लौट आए।
रांची पहुंचने पर मंत्री आलमगीर आलम ने पत्रकारों से कहा कि सरकार का काम बंद नहीं है। सरकार लगातार काम कर रही है।उन्होंने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गोवा, कर्नाटक की चुनी हुई सरकार को अपदस्थ किया गया। इस षड्यंत्र के कारण ही हम रायपुर में हैं। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक के बाद फिर वे लोग रायपुर लौट जाएंगे।
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज गुरुवार को कैबिनेट की बैठक होगी।बैठक शाम चार बजे प्रोजेक्ट भवन में होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार कुछ अहम फैसले ले सकती है। विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाने और सुखाड़ संबंधित प्रस्ताव पर कैबिनेट में फैसला लिए जाने की जानकारी भी सूत्रों से मिली है।
ज्ञात हो कि राज्य में उपजे सियासी संकट के बीच महागठबंधन की सरकार को बचाने के लिए मंगलवार को विशेष विमान से झामुमो के 19 और कांग्रेस के 12 विधायक रायपुर भेजे गए हैं। इसमें कांग्रेस के चारों मंत्री भी शामिल थे। बुधवार को प्रदीप यादव रायपुर पहुंच गए हैं। इधर, महागठबंधन के विधायकों को रायपुर भेजे जाने को लेकर विपक्ष बुधवार को भी सरकार पर हमलावर दिखा। एक दिन पहले झारखंड में यूपीए के मंत्री और विधायक समेत कुल 41 लोग रायपुर भेज दिए गए थे। इनमें कांग्रेस के चार मंत्रियों समेत 31 विधायक शामिल थे। यहां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इन नेताओं से मुलाकात भी की थी।





