डिफेंस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमताओं और मारक क्षमता में ऐतिहासिक इजाफा होने जा रहा है। वायुसेना के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) यानी राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है। केंद्र सरकार इसी वित्तीय वर्ष के अंत तक इस मेगा रक्षा सौदे को फाइनल करने की तैयारी में है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, रक्षा कंपनियों से प्राप्त प्रस्तावों की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही इस पर ठोस फैसला लिया जाएगा।

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'बाय एंड मेक' मॉडल के तहत होगा स्वदेशीकरण

इस बार की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इन अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में बड़े पैमाने पर भारत निर्मित स्वदेशी हथियारों और रक्षा प्रणालियों (DRDO विकसित) का इंटीग्रेशन किया जाएगा। यह सौदा 'बाय एंड मेक' (Buy and Make) कार्यक्रम के तहत पूरा किया जाएगा, जिसके तहत अधिकतर विमानों का निर्माण और असेंबलिंग भारत में ही होगी। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में भारत ने नौसेना के लिए ₹63,000 करोड़ की लागत से 26 राफेल मरीन विमानों का अनुबंध किया था।

घटती स्क्वाड्रन क्षमता और तेजस Mk1A की आपूर्ति का प्लान

वर्तमान में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 रह गई है, जिससे नए विमानों की तत्काल आवश्यकता है।

  • HAL की तैयारी: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास 27 एयरफ्रेम तैयार हैं। अमरीकी कंपनी GE से हर महीने 4 इंजनों की आपूर्ति के वादे के बाद, इस साल के अंत तक LCA तेजस Mk1A का कम से कम एक नया स्क्वाड्रन वायुसेना में शामिल हो जाएगा।
  • भविष्य का लक्ष्य: HAL प्रति वर्ष 24 विमानों का उत्पादन करेगा और 2033 तक 83 और 97 विमानों के कुल ऑर्डरों की आपूर्ति पूरी कर लेगा।

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AMCA और तेजस Mk2: स्वदेशी लड़ाकू विमानों पर पूरा ध्यान

भारत की पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट पर बोलते हुए रक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के विमान कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेगा। हमारा पूरा ध्यान AMCA पर केंद्रित है, जिसके लिए वेंडरों से प्रस्ताव मांगे जा चुके हैं। वहीं, स्वदेशी तेजस Mk2 लड़ाकू विमान की पहली उड़ान अगले वर्ष के मध्य में निर्धारित की गई है।

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