कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बेलीघाटा से विधायक कुणाल घोष पर 18 घंटे के भीतर दूसरी बार जानलेवा हमले का गंभीर आरोप सामने आया है। विधायक का दावा है कि हथियारबंद हमलावरों ने उन पर पिस्टल और लोहे की रॉड से हमला किया। इस घटना के बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था और विरोधियों की राजनीति पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

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18 घंटे के भीतर दो बार निशाना, पहली घटना में तोड़े गए थे कार के शीशे

विधायक कुणाल घोष के अनुसार, उन पर हुआ यह दूसरा हमला था। इससे पहले 26 सितंबर को भी जब वह हुगली के उत्तरपाड़ा से श्रीरामपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनसभा में शामिल होने जा रहे थे, तब उनकी कार को भीड़ ने घेर लिया था। उस दौरान वाहन पर अंडे और पत्थर बरसाए गए थे, जिससे कार के शीशे टूट गए थे। कुणाल घोष ने उस समय भी मौके पर मौजूद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

इसके ठीक 18 घंटे के भीतर उन पर पिस्टल और रॉड से हमले की दूसरी वारदात को अंजाम दिया गया, जिसने जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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"जब विधायक सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा?" — अभिषेक बनर्जी

घटना की तीव्र निंदा करते हुए टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपनी निष्ठा बदलने और पाला बदलने से साफ इनकार कर दिया है।

अभिषेक बनर्जी के मुख्य बयान एवं मांगें:

  • जनता की सुरक्षा पर चिंता: जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि की सुरक्षा का यह हाल है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
  • राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील: अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर. एन. रवि से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने मांग की कि राज्यपाल राज्य के पुलिस महानिदेशक (DG) और कोलकाता पुलिस आयुक्त (CP) से बात कर स्थिति की समीक्षा करें।
  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई: हमले में शामिल हर एक व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कानून के तहत कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए।
  • विपक्ष पर हमला: भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने सवाल किया कि यदि कोई दल जनादेश का दावा करता है, तो पाला न बदलने वाले नेताओं को डराने-धमकाने की राजनीति क्यों की जा रही है?
कानून के राज की मांग: टीएमसी नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि बंगाल की जनता शांति, सुरक्षा और सुशासन चाहती है। लोकतंत्र में राजनीतिक हिंसा और डराने-धमकाने के हथकंडों के लिए कोई जगह नहीं है।