महाकुंभनगर।संगम की रेती पर विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन महाकुंभ होने जा रहा है। 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी तक महाकुंभ का आयोजन होगा।योगी सरकार महाकुंभ को दिव्य और भव्य बनाने के लिए कमर कसकर तैयारी में जुटी है।अखाड़ा क्षेत्र में धीरे-धीरे रौनक नजर आने लगी है।देश के कोने-कोने से आए अद्भुत साधु और संन्यासी नजर आने लगे हैं।
विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुंभ में कई तरह के साधु आते हैं।इस बार आपको महाकुंभ अखाड़े में पेट लवर्स भी दिखाई देंगे, जिनकी साधना उनके डॉगी के बिना अधूरी है।इन्हीं में से एक महंत श्रवण गिरी हैं।महंत श्रवण गिरी मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर से महाकुंभ आए हैं।महंत श्रवण गिरी के एक हाथ में भगवान गणेश के नाम की जाप की माला रहती है तो दूसरे हाथ में डॉगी लाली का पट्टा रहता है।लाली महंत श्रवण गिरी लिए बेजुबान जानवर नहीं बल्कि उनके लिए उनकी साधना का हिस्सा है।लाली भी पूरी तरह ब्रह्मचारी है।
बता दें कि महाकुंभ के अखाड़ा सेक्टर में महंत श्रवण गिरी अकेले पेट लवर नहीं हैं।महिला संतो के साथ भी कई पेट रहते हैं।गुरुग्राम के खैराबाद आश्रम से महाकुंभ आई महंत पूर्णा गिरी अपने डॉगी अंगद के साथ ही सब जगह दिखती हैं।
महंत श्रवण गिरी बताते हैं कि 2019 के कुंभ में प्रयागराज से काशी जाते समय रास्ते में उन्हें लाली मिली थी।लाली तभी से उनके साथ है।लाली की फैमिली प्लानिंग करा दी गई है।लाली का हेल्थ कार्ड भी बनवाया है,जिसमें उसे फ्री इलाज मिलता है।
गुरुग्राम के खैराबाद में श्री महंत पहाड़ी बाबा की शिष्या पूर्णा गिरी बताती हैं कि अंगद उनके लिए उनका अंगरक्षक जैसा है। वह जब भी गहन साधना में जाती हैं तो अंगद आश्रम की दहलीज पर बैठकर उनकी साधना पूरा होने का इंतजार करता है।पूर्णा गिरी बताती हैं कि इतना समय उन्हें अपनी साधना के लिए तैयार होने में नहीं लगता, जितना ज्यादा समय वह अंगद को सजाने संवारने में लगाती हैं।





