पेरिस/अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: दुनिया के सबसे खूबसूरत देशों में शुमार फ्रांस इस समय भयंकर दंगों और जन-आक्रोश की चपेट में है। फ्रांस की जमीन से भड़की विरोध की यह चिंगारी अब सरहदों को लांघकर तीन महाद्वीपों—यूरोप, अमेरिका (लैटिन अमेरिका) और अफ्रीका तक फैल चुकी है। दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक बदहाली, महंगाई, आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर जनता का सैलाब उमड़ पड़ा है।

फ्रांस बना दंगों का केंद्र: 2400 से अधिक गिरफ्तारियां

विरोध प्रदर्शनों के नए केंद्र बने फ्रांस में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। देश भर में अब तक लगभग 2,400 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जबकि हिंसक झड़पों में करीब 1,000 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर बढ़ चुका है कि उन्होंने देश की ऐतिहासिक धरोहरों और लग्जरी ब्रांड्स को भी नहीं बख्शा:

  • फ्रांस के लिमोगेस में 19वीं सदी के ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग लगा दी गई, जिससे इसे भारी नुकसान पहुंचा है।
  • पेरिस और अन्य शहरों में रोलेक्स और लुई वितॉ (Louis Vuitton) जैसे प्रतिष्ठित स्टोरों में जमकर लूटपाट की गई।
  • पेरिस के उत्तर-पूर्व स्थित बेलेविले इलाके में डार्टी और यवेस सेंट लॉरेंट (Yves Saint Laurent) के स्टोर को भी निशाना बनाया गया।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने दंगाइयों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें सख्त चेतावनी दी है, तो वहीं प्रदर्शनकारियों ने भी हालात न सुधरने पर आंदोलन को और उग्र करने की धमकी दी है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में फैली अशांति के लिए इमिग्रेशन (प्रवास) को मुख्य जिम्मेदार ठहराया है और फ्रांस को सलाह दी है कि बहुत देर होने से पहले वह अपनी सीमाएं बंद कर दे।

यूरोप के अन्य देशों में भी सुलगती आग

फ्रांस से उठी यह चिंगारी यूरोप के कई अन्य देशों तक पहुंच चुकी है:

  • इटली और बेल्जियम: मिलान से लेकर ब्रसेल्स तक की सड़कें विरोध प्रदर्शनों से जल रही हैं।
  • अल्बानिया: यहां विश्वविद्यालयों के छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है।
  • पुर्तगाल और स्पेन: आसमान छूती महंगाई और आवास (घर) के गंभीर संकट ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

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लैटिन अमेरिका और अफ्रीकी महाद्वीप में भी उबाल

यह वैश्विक असंतोष केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि समंदर पार लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं:

  • अमेरिकी महाद्वीप: मैक्सिको में सुरक्षा व्यवस्था, कार्टेल हिंसा और न्यायिक सुधारों के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं। चिली के सेंटियागो में महंगाई और पेंशन सुधारों के विरोध में छात्र संगठनों व मजदूर यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया है। कोलंबिया में भी सरकारी नीतियों के खिलाफ हड़ताल का ऐलान किया गया है।
  • अफ्रीकी महाद्वीप: ट्यूनीशिया, नाइजीरिया, कांगो, केन्या, मॉरीशस और दक्षिण अफ्रीका में राजनीतिक व आर्थिक कारणों से उथल-पुथल मची है। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग और डरबन में हिंसा भड़की है, तो केन्या में ईंधन की बढ़ती कीमतों और महंगाई के खिलाफ जनसैलाब उमड़ पड़ा है। नाइजीरिया से लेकर मेडागास्कर तक बुनियादी सुविधाओं के अभाव में युवाओं का गुस्सा फूट रहा है।

इन तमाम घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या दुनिया किसी बहुत बड़े वैश्विक भूचाल या आर्थिक मंदी की तरफ बढ़ रही है?

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