मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल):

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बहरामपुर (मुर्शिदाबाद) से सांसद यूसुफ पठान ने चुनाव आयोग और एसआईआर (SIR - विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि देश के युवाओं और आम नागरिकों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता अपने मताधिकार की सुरक्षा चाहती है और केंद्र सरकार व चुनाव आयोग को उनकी आवाज सुननी होगी।

"जनता अपने हक के लिए सड़क पर है" — यूसुफ पठान Navbharat Times

विपक्ष द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए जा रहे सवालों के बीच यूसुफ पठान का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।

मुर्शिदाबाद में पत्रकारों और समर्थकों से बात करते हुए उन्होंने कहा:

"देश, राज्य और हमारे क्षेत्र के लोग अपने वोट के मौलिक अधिकार को बचाने के लिए आवाज उठा रहे हैं। आज युवा अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी और हक के लिए सजग हैं। इस देश के नागरिक वही चाहते हैं जो उनके और देश के बेहतर भविष्य के हित में हो, और शासन-प्रशासन को हर हाल में देशवासियों की आवाज सुननी ही होगी।"

1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'विपक्ष की महारैली'

विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर पक्षपात तथा निष्पक्ष चुनाव में विफल रहने का आरोप लगाते हुए आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल महारैली का आयोजन किया जा रहा है।

इससे पहले चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में दाखिल अपने हलफनामे में अपनी कार्यप्रणाली का बचाव किया है, लेकिन विपक्षी दल आयोग के जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं और इसे सीधे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं।

"यह किसी पार्टी का नहीं, हिंदुस्तान की आत्मा का मार्च है" — राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर देशवासियों से अपील करते हुए इस विरोध प्रदर्शन को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया है।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा:

"चलो दिल्ली रामलीला मार्च — यह लोकतंत्र को बचाने का, वोट चोरी को रोकने का और देश के संविधान को बचाने का ऐतिहासिक मार्च है। यह किसी एक राजनीतिक दल का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह हिंदुस्तान की आत्मा और उसकी लोकतांत्रिक चेतना का मार्च है।"

उन्होंने आगे कहा कि जो भी नागरिक देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करना चाहते हैं, वे एकजुट होकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।

बढ़ता राजनीतिक तनाव

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से कथित तौर पर लाखों नाम हटाए जाने और चुनावी निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के कारण यह मुद्दा अब सर्वोच्च अदालत से लेकर सड़क तक पहुँच गया है। 1 नवंबर की महारैली को लेकर सुरक्षा एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं देश भर से कार्यकर्ताओं के दिल्ली पहुँचने का सिलसिला शुरू हो चुका है।

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