भारतीय पैरा-आर्चर शीतल देवी ने एक बार फिर अपनी अद्भुत इच्छाशक्ति और उत्कृष्ट खेल कौशल का परिचय देते हुए एशियन पैरा गेम्स में स्वर्णिम सफलता हासिल की है। बिना हाथों के जन्मी शीतल देवी ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को मात देकर साबित कर दिया है कि लगन और मेहनत से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इस बार के एशियन पैरा गेम्स में कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट के साथ-साथ इंडिविजुअल (व्यक्तिगत) इवेंट में भी स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम किया है।
इंडिविजुअल इवेंट में रोमांचक जीत
व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में शीतल देवी ने सिंगापुर की आर्चर को एक कड़े और रोमांचक मुकाबले में 142-138 के अंतर से शिकस्त दी। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उन्होंने व्यक्तिगत वर्ग का गोल्ड मेडल अपने नाम किया। शीतल देवी अब तक एशियन पैरा गेम्स में कुल 4 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। इसके अलावा वह पिछले संस्करणों में दो गोल्ड और दो सिल्वर मेडल भी अपने नाम कर चुकी हैं।
कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट में भी जमाया रंग
शीतल देवी ने तोमन कुमार के साथ मिलकर कंपाउंड मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता। गुरुवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में भारतीय शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी ने इंडोनेशिया की टीम (तेओडोरा ऑडी आयुडिया फेरेली और केन स्वागुमिलंग) को 151-148 के स्कोर से मात दी।
- मैच का रोमांच:
- भारतीय जोड़ी ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपनी पकड़ मजबूत रखी। शुरुआती एंड में शीतल और तोमन ने 38-37 की बढ़त बनाई, जो दूसरे एंड के बाद 77-73 हो गई।
- हालांकि इंडोनेशिया ने तीसरे एंड में वापसी की कोशिश की, लेकिन आखिरी एंड में दोनों टीमों ने 38-38 अंक बनाए, जिससे भारत ने अपनी शुरुआती बढ़त के दम पर 3 अंक से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
- नया विश्व रिकॉर्ड:
- यह स्वर्ण पदक इस जोड़ी के बेहतरीन फॉर्म की सिर्फ एक बानगी है। इससे पहले इस जोड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड में 1,402 अंक बटोरकर एक नया विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था, जो पिछले रिकॉर्ड से दो अंक अधिक था।
इसे भी पढ़ेंः सौरव गांगुली बने दिल्ली कैपिटल्स के नए हेड कोच: IPL 2027 में संभालेंगे कमान, हेमांग बदानी की जगह लेंगे 'दादा'
शीतल देवी की प्रेरणादायक संघर्ष गाथा
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले से ताल्लुक रखने वाली शीतल देवी का जन्म बिना हाथों के हुआ था। अपनी इस शारीरिक असमर्थता को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह अपने पैरों और टांगों के सहारे कंपाउंड धनुष को साधती हैं और अपने कंधे तथा जबड़े का उपयोग करके धनुष की डोरी को खींचती और निशाना साधती हैं। उनका यह अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प आज देश-दुनिया के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुका है।
#SheetalDevi #AsianParaGames2026 #ParaArchery #TeamIndia #GoldMedal #Inspiration #ProudMoment #IndianSports





